शिक्षा के नाम पर किया जा रहा व्यापार, अभिभावकों को मजबूरी में
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। शहर के अधिकतर निजी स्कूलों में शिक्षा के नाम पर व्यापार किया जा रहा है। हर साल सिलेबस में हल्का सा बदलाव कर किताबें बदल दी जा रही हैं। इससे बड़े भाई-बहन की किताबें छोटे के काम नहीं आती हैं। जम्मू शहर से 19 किलोमीटर दूर आरएस पुरा के ब्लॉसम हाई स्कूल पर भी अभिभावकों ने यही आरोप लगाए हैं। आरएस पुरा के निवासी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, उसके दो बच्चे इसी स्कूल में पढ़ते हैं। बड़ा बेटा कक्षा दूसरी और छोटा एलकेजी में है। बड़े की किताबें और वर्दी सुरक्षित रखी थी, ताकि छोटे के काम आ सकें, लेकिन अब स्कूल प्रबंधन ने किताबें और वर्दी में हल्का सा बदलाव कर बोझ बढ़ा दिया है। मजबूरी में उनको नई पुस्तकें और वर्दी लेनी ही पड़ रही है। यही स्थिति शहर के अन्य निजी स्कूलों में भी है। मुनाफाखोरी के इस खेल में अभिभावक पिस रहे हैं और स्कूल शिक्षा विभाग शिकायत के ही इंतजार में है।
शहर के कई ऐसे स्कूल हैं जो पूरी यूनिफार्म को न बदल केवल टाई, बेल्ट या फिर ट्रैक सूट, हाफ पेंट बदलकर अभिभावकों को लूट रहे हैं। स्कूल वाले बच्चों का उत्पीड़न न करें इसके लिए अभिभावक अपना नाम प्रकाशित नहीं करने की बात कहते हैं। आरएस पुरा के एक अन्य अभिभावक ने बताया कि दूसरी कक्षा के बच्चे की किताबें तीन हजार रुपये में ली हैं। स्कूल वालों ने मैसेज पर स्कूल से ही किताबें खरीदने को कहा। एक किताब की कीमत 150 रुपये 500 रुपये तक है। व्याकरण की किताब 250 रुपये, गणित की 535 रुपये, बच्चों आओ लिखना सीखें नाम की किताब 150 रुपये, साइंस की 160 रुपये में बेची गई है। कक्षा एक के बच्चे के लिए एक सेट यूनिफार्म करीब दो से ढाई हजार रुपये के बीच में पड़ता है। हाफ शार्ट, हाफ पैंट, एक हजार रुपये में बेची जा रही है।
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अभिभावक कहीं से भी खरीद सकते हैं पुस्तकें
अभिभावकों के इस आरोप पर ब्लॉसम हाई स्कूल के प्रिंसिपल दानिश शर्मा ने कहा कि कक्षा पांचवीं तक जो पुस्तकें बच्चों को पढ़ाई जा रही हैं वह नई शिक्षा नीति (एनईपीसी) के मापदंड का पालन करने वाली है। अभिभावक कहीं से भी पुस्तकें खरीद सकते हैं। सिर्फ उन बच्चों को हाफ पेंट लेने को कहा है, जिनकी पेंट खराब हुई है।
तय मासिक और वार्षिक फीस अधिक ले रहा स्कूल
जम्मू। शहर के शिक्षा निकेतन सीनियर सेकेंडरी स्कूल जीवन नगर में बच्चों से मासिक और वार्षिक फीस अतिरिक्त ली जा रही है। यह आरोप स्कूल में पढ़ने वाले कई बच्चों के अभिभावकों ने नाम न छापने की शर्त पर लगाया है। स्कूल फीस फिक्सेशन कमेटी की ओर से तय की गई फीस से अधिक फीस ली जा रहा है। इसके साथ ही अभिभावकों से प्रॉस्पेक्टर का 500 रुपये लिए जा रहे हैं। मंगलवार को स्कूलों में अपने बच्चे का 7वीं कक्षा में दाखिला करवाने पहुंचे अभिभावकों ने कहा कि बच्चे की फीस 6180 रुपये ली, जबकि मासिक फीस 1350 है, जो फीस फिक्सेशन कमेटी द्वारा तय की गई फीस से ज्यादा है। ब्यूरो