- जीएमसी जम्मू से एयरपोर्ट तक 7.7 किमी के सफर में लग गए 18 मिनट
- रूट पर यातायात प्रबंधन में समन्वय की कमी दिखी
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। जीएमसी से एयरपोर्ट जम्मू तक बुधवार की सुबह ग्रीन कॉरिडोर के लिए की गई मॉकड्रिल में समन्वय की कमी दिखी। जीएमसी से डमी मानव अंग लेकर दो एंबुलेंस निकलीं। इन्हें जीएमसी से एयरपोर्ट तक 7.7 किलोमीटर का सफर तय करना था। इसमें दावा किया गया था कि मॉकड्रिल के दौरान एंबुलेंस रूट पर वाहनों की आवाजाही को पूरी तरह से बंद रखा जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं दिखा। तवी पुल पर महाराजा हरि सिंह प्रतिमा स्थल पर फ्लाईओवर पर ग्रीन कॉरिडोर के लिए निकली एंबुलेंस के साथ आम वाहन दौड़ते नजर आए। जिससे एंबुलेंस को 7.7 किमी का सफर 18 मिनट में तय करना पड़ा, जबकि यह 8-10 मिनट में तय हो सकता था।
मॉकड्रिल के दौरान जीएमसी जम्मू के ऑपरेशन थियेटर से सुबह 10.30 बजे लिवर, कॉर्निया, हार्ट जैसे डमी अंगों को डिब्बे में बंद कर ओपीडी परिसर के बाहर लाया गया, जहां पहले से दो एंबुलेंस खड़ी थीं। इसमें एक एंबुलेंस सोटो (स्टेट ऑर्गन एंड टिशू ट्रांसप्लांट ऑर्गेनाइजेशन) और दूसरी जीएमसी प्रशासन की थी। सोटो की एंबुलेंस में मानव अंग रखे गए। इसके बाद दोनों एंबुलेंस को पुलिस की दो फ्लाइंग स्क्वायड के साथ रवाना किया गया। लेकिन जैसे ही एंबुलेंस अस्पताल के बाहर निकली उसे महेशपुरा चौक पर सड़क पर दौड़ रहे आम वाहनों का सामना करना पड़ा। इसके बाद एंबुलेंस फ्लाईओवर पर पहुंची, लेकिन यहां भी तवी पुल से पीछे से आम वाहन एंबुलेंस के साथ दौड़ रहे थे। हालांकि डोगरा चौक से वाहनों को रोक दिया गया था। तवी पुल पर आम वाहनों के चलने के कारण अस्पताल की एंबुलेंस आगे निकल गई, जबकि सोटो की एंबुलेंस कुछ सौ मीटर की दूरी पर पीछे से अन्य वाहनों के साथ आती नजर आई। जीएमसी जम्मू से एयरपोर्ट जम्मू तक के 7.7 किमी. के सफर को औसतन एंबुलेंस ने प्रति एक किमी. को दो मिनट से कुछ अधिक समय में पूरा किया, जबकि ग्रीन कॉरिडोर में तेज रफ्तार से जा रही एंबुलेंस को कम समय में एयरपोर्ट तक पहुंच जाना चाहिए था।
जल्द शुरू करेंगे अंग भेजने की प्रक्रिया : प्रिंसिपल
जीएमसी जम्मू की प्रिंसिपल डाॅ. शशि सूदन ने कहा कि ग्रीन कॉरिडोर के सफल मॉकड्रिल के बाद दूसरे राज्यों में ब्रेनडेड वाले मरीजों से महत्वपूर्ण अंग लेकर प्रत्यारोपण के लिए भेजे जा सकते हैं। इसमें लिवर, हार्ट, पैनक्रिया, टिशू, किडनी आदि हो सकते हैं। नोटो (नेशनल ऑर्गन एंड टिशू ट्रांसप्लांट ऑर्गेनाइजेशन) का रीजनल सेंटर पीजीआई चंडीगढ़ में है। प्रत्यारोपण के लिए अंगदान को पीजीआई चंडीगढ़ के अलावा देशभर के अन्य चिकित्सा केंद्रों में भेजा जा सकता है। इसमें नोटो की रिट्रेवल टीम जीएमसी जम्मू में आकर ब्रेनडेड मामलों वाले मरीजों से जरूरी अंग लेकर जाएगी। जीएमसी और एसोसिएटेड अस्पतालों में किडनी और कॉर्निया प्रत्यारोपण की सुविधा उपलब्ध है।