जन वितरण प्रणाली और दफ्तरी हाजिरी को आधार कार्ड से लिंक करने की कवायद जी का जंजाल बन गई है। आधार कार्ड की अनिवार्यता के बीच राज्य भर में लोगों के पंजीकरण से लेकर कार्ड जारी करने की प्रक्रिया अव्यवस्था का शिकार हो रही है।
अलग-अलग इलाकों में बने रजिस्ट्रेशन काउंटरों में लंबी कतारें लग रही हैं, लेकिन जिन लोगों के कार्ड बनना शेष हैं, उनकी मुसीबतें लगातार बढ़ती जा रही हैं। इनमें से जो मामले छूट गए हैं, उनके लिए तो मुसीबत पहाड़ सरीखी साबित हो रही है।
प्रशासनिक कार्यालयों में स्थापित केंद्र से लोगों को कभी नगर निगम तो कभी सेंसस विभाग कार्यालय भेजा जा रहा है। क्षेत्रवार कौन सा कार्ड कहां से बनना है, इसे लेकर लोगों में स्थिति स्पष्ट नहीं हो रही। नतीजतन आधार कार्ड के आवेदकों को दफ्तरों के चक्करों ने परेशान कर दिया है।
पुरानी मंडी क्षेत्र से पहले नगर निगम और फिर सेंसस विभाग परिसर पहुंचे वेद राज ने बताया कि पत्नी का कार्ड बन चुका है, लेकिन उनका अपना कार्ड बनाने के लिए विभागों के चक्कर कटवाए जा रहे हैं। वह सत्तर वर्ष के हैं, लेकिन तीन अलग-अलग विभागों के चक्करों ने उन्हें परेशान कर दिया है।
इसी तरह से नगर निगम केंद्र में पहुंची मीना देवी ने कहा दो चक्कर लगा चुकी हैं, लेकिन उन्हें फिर सेंसस विभाग के पास भेजा जा रहा है। उन्हें बताया गया था कि निवास क्षेत्र में आकर सरकारी प्रतिनिधि उनकी रजिस्ट्रेशन का काम पूरा करेंगे, लेकिन कुछ नहीं किया गया।
कमोबेश ऐसी ही स्थिति हजारों लोगों की है, जो रोजाना एक विभाग से दूसरे विभाग के पास सही मालुमात हासिल करने के लिए पहुंच रहे हैं। सेंसस निदेशालय जम्मू कार्यालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि अन्य विभागों से लोगों को सेंसस कार्यालय भेज दिया जाता है, जबकि क्षेत्रवार सेंटर खुले हैं।
राज्य में आधार कार्ड रजिस्ट्रेशन की स्थिति संबंधी पूछे जाने पर अधिकारी ने बताया कि कुल 1.25 करोड़ जनसंख्या है, जिनमें से 1.09 करोड़ लोगों को डिजिटाइज कर लिया गया है।
इनमें से 66 लाख लोगों को आधार कार्ड जारी हो चुके हैं। शेष कार्ड जल्द जारी करने का प्रयास किया जा रहा है। यह लक्ष्य कब पूरा होगा, इस पर निश्चित रूप से कहना मुमकिन नहीं है।