जम्मू। बरसात के साथ ही डेंगू का खतरा भी बढ़ने लगा है। जम्मू में डेंगू के चार पॉजिटिव मामले मिले चुके हैं। इसके अलावा राजोरी-पुंछ और सांबा में मलेरिया के 20 मामले सामने आए हैं। जम्मू संभाग के कई जिले हर साल मलेरिया और डेंगू से प्रभावित होते रहे हैं। खासतौर पर डेंगू कई लोगों की जान ले चुका है।
बरसात के आगे बढ़ने के साथ विभिन्न स्थलों पर इकट्ठा हो रहा पानी मच्छरों को पनपने में मदद कर रहा है। प्रदेश में दस चिकित्सा केंद्रों को चिह्नित किया गया है, जहां मरीजों को निशुल्क चिकित्सा सुविधाएं मुहैया करवाई जा रही हैं। जम्मू संभाग के जिला कठुआ, सांबा, जम्मू, उधमपुर, डोडा सहित अन्य जिले डेंगू से प्रभावित रहे हैं। शहर में ही वेयर हाउस, नरवाल यार्ड, जेकेएसआरटीसी यार्ड सहित अन्य ऐसे स्थल हैं, जहां मच्छर पैदा होते हैं। नए मामलों में जिला जम्मू से सबसे अधिक मलेरिया और डेंगू के मामले मिले हैं। संभाग में अब तक वर्ष 2013 में सर्वाधिक 1838 डेंगू के पॉजिटिव मामले मिले थे और चार लोगों की मौत हुई थी। हालांकि अनाधिकारिक तौर पर अन्य राज्यों में जम्मू संभाग से सैकड़ों डेंगू के मरीज भर्ती हुए थे और कई की जान चली गई थी। विशेषज्ञों के अनुसार आगामी दिनों में बरसात के साथ मलेरिया और डेंगू के मामलों में बढ़ोतरी हो सकती है। अमूमन प्रदेश में मानसून 15 सितंबर तक सक्रिय रहता है, लेकिन डेंगू के अक्तूबर नवंबर तक भी मामले आते रहते हैं।
लोग ऐसे बरतें सावधानी
- घर के अंदर और आसपास पानी जमा न होने दें
- बर्तन को खाली कर रखें या उसे उलटा कर कर रखें
- अगर आप किसी बर्तन, ड्रम या बाल्टी में पानी जमा करते हैं तो उसे ढक कर रखें
- घर में कीटनाशक का छिड़काव करें
- कूलरों के पानी को नियमित बदलें।
- खिड़की और दरवाजे में जाली लगाकर रखें। शरीर को पूरी तरह ठकने वाले कपड़े पहनें।
डेंगू के लक्षण और इलाज
संक्रमित मच्छर के काटने के तीन से चौदह दिन के भीतर डेंगू के लक्षण दिखाई देते हैं। इनमें तेज ठंडी लगकर बुखार आना, सिरदर्द, आंखों में दर्द, बदन दर्द/जोड़ों में दर्द, भूख कम लगना, जी मचलाना, उल्टी-दस्त लगना, चमड़ी के नीचे लाल चट्टे आना, गंभीर स्थिति में आंख, नाक में से खून भी निकल सकता है। डेंगू की रोकथाम ही इसका सबसे बेहतर इलाज है। रोगी को डाक्टर की तुरंत सलाह लेकर उसके अनुरूप ही दवा लेनी चाहिए। इस दौरान बुखार में सिरदर्द की दवाओं का प्रयोग नहीं करना चाहिए। नियमित रूप से रक्त में प्लेटलेट कांउट की जांच करवानी चाहिए।
डेंगू बुखार संक्रमण से होने वाली बीमारी है। एक बार डेंगू होने के बाद इस संक्रमण से मरीज को लंबे समय के लिए प्रतिरोधक क्षमता मिल जाती है, लेकिन दूसरी बार डेंगू बुखार जानलेवा साबित हो सकता है। दूसरी बार डेंगू बुखार को डेंगू हेमोरहेजिक फीवर कहते हैं। यह बुखार हवा, पानी, साथ खाना खाने या छूने से नहीं फैलता। यह संक्रमित मादा एडीज एजिप्टी मच्छर के काटने से होता है। यह मच्छर दिन में ज्यादा सक्रिय होते हैं। पर्दों के पीछे या अंधेरे वाली जगह पर रहते हैं।
- डॉक्टर एसके बाली, पूर्व एचओडी, नेफ्रोलॉजी विभाग, सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल