फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

मिट्टी के दीयों की बढ़ रही है डिमांड

विज्ञापन
मिट्टी को दीये बनाता कुम्हार सेवाराम।
विज्ञापन
बाड़ी ब्राह्मणा। इस दिवाली पर लोकल फार वोकल को तरजीह देने की कवायद शुरू हो गई है। प्रधानमंत्री के इस जुमले को लेकर लोगों में उत्साह भरपूर देखा जा रहा है। इस कड़ी में कुम्हार एक तरफ उत्साहित हैं कि उनके उत्पाद को पसंद किया जाएगा। तो दूसरी तरफ बाजार में दुकानदार भी मिट्टी के दीयों को बढ़ावा दे रहे हैं।
विज्ञापन

दीपों के पर्व दीपावली पर मिट्टी के दीपक सजाने का अपना अलग ही अंदाज और उपयोगिता है। दूसरी तरफ बाजार में बिजली की लड़ियाें की भी भरमार देखी जाती है। लेकिन इसी बीच में ऐसे लोग और परिवार भी हैं जो आज भी परंपरागत मिट्टी के दीपों को ही पसंद करते हैं। दिवाली पर मिट्टी के दीयों की बाजार में काफी मांग है। इस बार लोग पारंपरिक चीजों को महत्व दे रहे हैं, जिसके कारण चीन निर्मित वस्तुओं का बहिष्कार कर लोग देसी चीजों को अपना रहे हैं। बड़े पैमाने पर दिवाली के इस पर्व पर मिट्टी के दीयों की खरीदारी कर रहे हैं। दर्जनों के हिसाब से लोग दुकानदारों से मिट्टी के दीपक की मांग कर रहे हैं। मांग इतनी बढ़ गई है कि बाजार में मिट्टी के दीयों की आपूर्ति के लिए भी मुश्किल हो रही है। क्योंकि कुम्हार ज्यादा मांग को देखते हुए मिट्टी के दीये बनाने में तो जुटे हैं, लेकिन मांग के अनुसार बाजारों में आपूर्ति नहीं पहुंच पा रहे हैं।
कुम्हार सेवाराम का कहना है कि दिवाली पर्व पर वह 5000 दीये बनाकर बेच देते हैं। इस बार दीये बेचने की संख्या दोगुनी हो गई है। बाजारों से मांग भी बड़े पैमाने पर आ रही है। इसे देखते हुए दिन व रात वह दीये बनाने में लगे हैं। उम्मीद है कि इस बार 15000 दिये वह बेच देंगे।
विज्ञापन

दुकानदार स्वर्ण कुमार से पता चला कि इस बार दिवाली पर मिट्टी के दीयों की खरीदारी करने में लोग रुचि दिखा रहे हैं। बाजारों में अन्य सामान खरीदने के साथ-साथ मिट्टी के दीयों की अभी से खरीदारी कर रहे हैं। मिट्टी के दीयों की आपूर्ति बाजारों में नहीं हो पा रही है, जिसके चलते ग्राहक को खाली हाथ भी लौटना पड़ रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें