अखनूर। गांव घराला में शुक्रवार को श्रीमद्भागवत कथा का शुभारंभ किया गया। कलश और शोभा यात्रा के माध्यम से संत सुभाष शास्त्री का स्वागत किया गया। शास्त्री जी ने प्रवचन में कहा कि आत्मा शरीर नहीं, जो नाशवान है। आत्मा अविवागी है। इसे कोई मार ही नहीं सकता। बस इतना ज्ञान आपको होना चाहिए कि आपके सब कष्ट समाप्त हो जाएंगे।
कथा वाचक ने अंत में समझाया कि केवल मनुष्य का जन्म ऐसा है, जिसमें जीत कर्म करते पूर्णता स्वरूत्र होता है। यह स्थिति अन्य में जीवकों में उपलब्ध नहीं, मनुष्य का पालन कर केवल शुभ कार्य ही करें, अन्य विषय में सोचे भी नहीं। क्योंकि उसको पतन और विनाश सुवरचित होता। उन्होंने कहा कि भगवान के प्रति हर मनुष्य को आस्था रखनी चाहिए, ताकि दुखद घटी में भगवान मनुष्य की मदद कर सके।