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थानेदारों की जिम्मेदारी

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जम्मू। फर्जी लाइसेंस का गढ़ बन चुके जम्मू कश्मीर में गन डीलरों का एक रैकेट सक्रिय है। थानेदारों की लापरवाही से फर्जी गन लाइसेंस बनाए जा रहे हैं और गन डीलर मोटी रकम लेकर बंदूकें बेच रहे हैैं।
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रेलवे स्टेशन के निकट गन डीलरों की सबसे अधिक दुकानें हैं। बताया है लाइसेंस बनाने के बाद बेची गई गन को रोचनामचे में चढ़ाने के प्रावधान को भी फालो नहीं किया जा रहा है। रेलवे स्टेशन गन डीलर एसोसिएशन ने सरकार से मांग की है कि वह गन लाइसेंस पर प्रतिबंध लगाने के आदेश को वापस ले। आदेश के कारण जो गन डीलर ईमानदारी से काम कर रहे हैं। उनकी रोजी-रोटी व कमाई पर भी प्रभाव पड़ रहा है।
सूत्रों के अनुसार गन लाइसेंस और गन बेचने के बाद थाने के रोजनामचे में इसकी सूचना देना अनिवार्य है। आर्म्स एक्ट में भी सभी गन बिक्री के बाद संबंधित थानेदारों को सूचना देना गन डीलरों की जिम्मेदारी है। पंजाब, हरियाणा, नई दिल्ली आदि राज्यों में संबंधित थाने में रिपोर्ट दी जाती है। रेलवे स्टेशन में सबसे अधिक 43 दुकानें हैं। इनसे सेना के जवान गन खरीदकर अपने राज्यों में ले जाते हैं। स्टेशन पर किसी भी समय हादसा होने के आसार हैं और पुलिस कोई कार्रवाई नहीं कर रही है। बिना सूचना के जाने वाली गन पर भी नजर नहीं रखी जा रही है।
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सूत्रों के अनुसार गृह विभाग के प्रधान सचिव सुरेश कुमार के जम्मू कश्मीर के सभी जिला मजिस्ट्रेट को लाइसेंस नहीं बनाने के आदेशों पर गन फैक्ट्रियों और गन डीलरों के बीच हड़कंप मच गया है।

कार्रवाई की तैयारी
जम्मू। गृह विभाग उन डीलरों के खिलाफ भी कार्रवाई करने की तैयारी में है, जिनमें एक परिवार के सदस्य के पास एक से अधिक डीलरशिप के लाइसेंस हैं। फैक्ट्री के अलावा गन डीलरशिप के लाइसेंस हासिल करने की भी जांच की जा रही है। ब्यूरो

ईमानदार भी पिस गए
जम्मू। गृह विभाग के गन लाइसेंस बनाने पर प्रतिबंध के आदेशों के बाद कई ईमानदार डीलर भी पिस गए हैं। स्टेशन, हरी मार्केट, रेजीडेंसी रोड में गन डीलरों के अलावा छोटी दुकानें चलाने वाले भी इस आदेश का शिकार हुए हैं। कई लोग इसे लेकर गंभीर हैं। ब्यूरो

जमानत की अर्जी रद
जम्मू। गांधीनगर पुलिस द्वारा फर्जी गन लाइसेंस बनाने वाले सेना और पुलिस के कर्मचारियों के पकड़े जाने के बाद मामला गरमाया। दोनों कर्मचारियों ने सीजेएम कोर्ट में जमानत की अर्जी पेश की। इनकी जमानत अर्जी को सीजेएम ने रद कर दिया है। सीजेएम के अनुसार मामला गंभीर है और आरोपियों को जमानत नहीं दी जा सकती है। सात दिन की रिमांड के बाद दोनों आरोपियों को पांच दिन और रिमांड पर भेज दिया है। ब्यूरो
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