सीएम महबूबा मुफ्ती के साथ डिप्टी सीएम
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अनुच्छेद 370 पर पीडीपी और भाजपा के बीच तनी तरकार की डोर ढीली पड़ गई है। मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती द्वारा अनुच्छेद 370 को हटाने की बात करने वालों को राष्ट्र विरोधी के समकक्ष खड़ा कर दिए जाने के बाद दोनों दलों में मतभेद की खाई फिर से चौड़ी होती दिखी।
भाजपा विधायकों को लगा कि उनके लिए अपने क्षेत्रों में वोटरों के सवालों का उत्तर देना मुश्किल हो जाएगा। लिहाजा, भाजपा के कुछ विधायकों ने सदन में विरोध जताने का फैसला कर लिया। सदन में नेकां और कांग्रेस विधायकों के हंगामे के बाद भाजपा और पीडीपी की खींचतान भी बढ़ी, लेकिन, देर शाम सुलगती आग को बुझाने में सफलता मिल गई। पीडीपी और भाजपा दोनों दल अब इस मुद्दे को ज्यादा तूल देने के मूड में नहीं हैं।
भाजपा सूत्रों के मुताबिक मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती और वित्त मंत्री डॉ. हसीब द्राबू की भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह और महासचिव राम माधव से बातचीत हुई। महबूबा ने स्पष्ट किया कि उनका मतलब एजेंडा आफ एलायंस के प्रति प्रतिबद्धता तक सीमित था।
उन्होंने भाषण के उस अंश को भी बताया जिसमें उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और वित्त मंत्री अरुण जेटली की एजेंडे पर प्रतिबद्धता का जिक्र किया था। इस बातचीत के बाद मुख्यमंत्री महबूबा और उप मुख्यमंत्री डॉ. निर्मल सिंह के बीच फोन पर बातचीत हुई।