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राजनयिकों से नेताओं की मुलाकात पर भड़की कांग्रेस, दो को भेजा कारण बताओ नोटिस

Sat, 11 Jan 2020 05:20 PM IST
प्रशांत कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : social media
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कश्मीर में राजनयिकों से मिलने गए राजनेताओं के दल में शामिल रहे हिलाल शाह चेयरमैन एमसी अनंतनाग और पूर्व विधायक शोएब लोन को प्रदेश कांग्रेस ने कारण बताओ नोटिस जारी किया है। पार्टी का कहना है कि राजनयिकों से मुलाकात के लिए न ही उन्हें प्रशासन की ओर से आमंत्रण था और ना ही उन्होंने पार्टी से अनुमति ली थी।

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पार्टी के मुख्य प्रवक्ता रविंद्र शर्मा ने बताया कि दोनों नेताओं ने राजनयिकों से मिलने के पहले पार्टी से ऐसी कोई अनुमति नहीं ली थी। अगर वे उचित जवाब देने में विफल रहते हैं तो उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

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370 के प्रावधानों को निरस्त करने के फैसले का गुज्जर समुदाय ने किया स्वागत

वहीं जम्मू-कश्मीर के दो दिवसीय दौरे पर आए अमेरिका समेत 15 देशों के राजनयिकों के दल से पश्चिम पाकिस्तान के शरणार्थियों, वाल्मीकि समाज, गुज्जरों और वकीलों के प्रतिनिधियों समेत विभिन्न प्रतिनिधिमंडलों के साथ विदेशी दल की बैठक हुई। राजनयिकों के सवालों का जवाब देते हुए अधिकतर प्रतिनिधियों ने अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को निरस्त करने के फैसले का स्वागत किया और कहा कि यह उनके समुदायों के लिए लाभदायक है।

जम्मू-कश्मीर गुज्जर यूनाइटेड फोरम के अध्यक्ष गुलाम नबी खटाना ने बताया कि हमने राजनयिकों को बताया कि 370 के प्रावधानों को निरस्त करने के फैसले का गुज्जर समुदाय स्वागत करता है। इससे समुदाय को आरक्षण का लाभ और वन पर अधिकार मिलेगा, जिससे सात दशक से उन्हें वंचित किया जा रहा था।

बताया कि कश्मीर केंद्रित पार्टियां हमेशा अपने हितों को आगे रखती थीं और अन्य के अधिकारों से इनकार करती रहीं। राजोरी के वकील आसिफ  चौधरी ने कहा कि उनके लिए अनुच्छेद 370 फ ायदेमंद नहीं था और इसको निरस्त करने से उनके समुदाय के विकास एवं प्रगति के नए रास्ते खुले हैं।
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अनुच्छेद 370 को खत्म करना देर से किया गया न्याय हैः लब्बा राम गांधी

पश्चिमी पाकिस्तान शरणार्थी संगठन के अध्यक्ष लब्बा राम गांधी ने कहा कि अनुच्छेद 370 को खत्म करना उनके लिए देर से किया गया न्याय है। यह समुदाय को न्याय दिलाने की ओर कदम है। उन्होंने कहा ‘पिछले सात दशक से हम जम्मू-कश्मीर के अनावश्यक नागरिक थे क्योंकि कश्मीर केंद्रित पार्टियों की सरकार ने हमें मत देने, नौकरी करने, शिक्षा प्राप्त करने और जमीन का अधिकार नहीं दिया था।

अब हम जम्मू-कश्मीर का नागरिक बनकर गौरवान्वित हैं। यह भेदभाव वाला था जो हमें जम्मू-कश्मीर में रहने के हमारे अधिकार से वंचित करता था।’ पाक के कब्जे वाले कश्मीर के शरणार्थी नरेंद्र सिंह ने भी अनुच्छेद 370 को निरस्त करने के फैसले का समर्थन किया।
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