वर्ष 2019 में केंद्र को भेजे गए छह हजार से ज्यादा मामलों में से केवल 2200 ही मंजूर हो पाए हैं। दरअसल, जम्मू-कश्मीर में राजस्व रिकॉर्ड में कई खामियां रहीं। इसमें ज्यादातर मामलों में टाइटल ऑफ लैंड को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। कई मामलों में एक ही जमीन के ज्यादा मालिक बन गए हैं।
ऐसे में बैंक से भवन निर्माण को पैसे नहीं मिल पा रहे हैं। नगर निगम, नगर परिषद और नगर पालिका इलाकों में 10 फुट रास्ता छोड़ने की शर्त भी बाधा बन रही है। वर्ष 2019 में जेएंडके में आने वाली 69 कमेटियों, छह काउंसिल और 2 नगर निगमों से 6 हजार से ज्यादा मामले योजना के तहत प्रस्तावित किए गए थे। 3800 मामलों में कहीं जमीन आड़े आई तो कहीं गलियां तंग होने के कारण राशि नहीं मिल पाई।
जम्मू शहर में ओल्ड सिटी समेत अन्य इलाकों से 400 से ज्यादा मामले नगर निगम के पास विचाराधीन हैं। इनमें टाइटल आफ लैंड को लेकर पेच है। अब स्थिति स्पष्ट होने पर इन मामलों को मंजूरी मिल सकती है।
इस फैसले से लाखों गरीबों के घर बन सकेंगे। जो फैसले प्रशासन को लेने चाहिए थे, ऐसे फैसले एलजी प्रशासन से संभव हो पा रहे हैं। आवास योजना में दो ही शर्तें बाधा बन रही थीं। पहली तो जमीन असली मालिक के नाम होनी चाहिए, दूसरी भवन निर्माण की अनुमति होनी चाहिए। दोनों मसलों का हल हो सकेगा और लोग योजना के तहत अपना सपना का घर बना सकेंगे।- राजेंद्र शर्मा, चेयरमैन, हाउसिंग फॉर ऑल
टाइटल ऑफ लैंड मसलों की स्थिति क्लियर करने को अधिसूचना जारी की गई है। अधिसूचना में पहले मामलों को चिह्नित किया जाएगा। बाद में कब्जों को नियमित किया जाएगा। इससे जमीन का हक असली मालिक को मिल सकेगा और आवास योजना का लाभ मिल सकेगा।- प्रेम सिंह, एसीआर, जम्मू