विधानसभा में शुक्रवार को लगातार दूसरे दिन रिज़र्व कैटेगरी के पदोन्नति में आरक्षण के मुद्दे पर न सिर्फ कांग्रेस, बल्कि पीडीपी-भाजपा गठबंधन के विधायकों ने भी हंगामा किया। इस दौरान विपक्ष के विधायक वेल में भी उतरे। बाद में वाक आउट किया।
हंगामा सदन में करीब 15 मिनट तक जारी रहा। इस दौरान रिजर्व कैटेगरी को इंसाफ दो, नहीं चलेगी नहीं चलेगी गुंडागर्दी नहीं चलेगी, जो हमसे टकराएगा चूर-चूर हो जाएगा के नारे बुलंद किए। हंगामे के चलते कुछ पलों के लिए सदन में अव्यवस्था का माहौल बन रहा। स्पीकर कवींद्र गुप्ता ने विपक्ष के सदस्यों को बैठने के लिए आग्रह किया। लेकिन हंगामा कर रहे विधायकों पर कोई असर नहीं हुआ।
सदन की कार्यवाही शुरू हुई, तो उसी दौरान कांग्रेस के न्वांग रिग्जिन जोरा, असगर करबलाई और चौधरी अकरम आरक्षण के मुद्दे पर नारेबाजी करते हुए वेल में पहुंच गए। नेकां के जावेद राणा भी उनके साथ शामिल हो गए। मियां अल्ताफ सीट से खड़े हो गए और आरक्षण बहाली पर नारेबाजी करने लगे। इस बीच पीडीपी के कमर हुसैन भी वेल में कांग्रेस और नेकां विधायकों के साथ खड़े नजर आए।
हालांकि भाजपा के डा. गगन भगत, दीनानाथ, डा. मन्याल, डा. किशन भगत और कुलदीप राज आरक्षण के समर्थन में बोलने लगे। वेल में नारेबाजी करने के बाद कांग्रेस, नेकां और पीडीपी के विधायक आरक्षण समर्थक भाजपा विधायकों के पास पहुंच गए। उन्होंने वहां से जमकर नारेबाजी की।
स्पीकर द्वारा अपनी सीटों पर लौटने का आग्रह करने और मंत्री के बयान का यकीन दिलाने पर वह शांत हुए। जोरा ने स्पीकर से कहा कि आप सरकार को निर्देश दें कि वह सदन में यकीन दिलाएं कि सरकारी नौकरियों में रिज़र्व कैटेगरी के लिए पदोन्नति आरक्षण को यकीनी बनाने के लिए राज्य संविधान में संशोधन करेगी।
यह सुनते ही विधि एवं न्याय मंत्री अब्दुल हक खान ने कहा कि हम पहले स्पष्ट कर चुके हैं, यह मामला न्यायालय के विचाराधीन है। उच्चतम न्यायालय का फैसला आने के बाद ही सरकार आगे कुछ कर सकती है।
जोरा ने मंत्री के बयान पर एतराज जताते हुए कहा कि अदालत किसी भी तरह से राज्य सरकार को संविधान में बदलाव से नहीं रोक सकती। इसके साथ ही उन्होंने दोबारा नारेबाजी शुरू कर दी और सदन से वाक आउट कर गए। हालांकि भाजपा विधायक वाक आउट में शामिल नहीं हुए।