जोशी ने कहा कि सुरक्षा बलों की एक और पहल के सफल परिणाम सामने आ रहे हैं। कुछ मुठभेड़ों के दौरान स्थानीय आतंकवादियों ने सुरक्षाबलों के सामने आत्मसमर्पण कर दिया जो इस बात का संकेत है कि वह अब हथियारों से तौबा करना चाहते हैं। युवाओं को आतंक के रास्ते पर जाने से रोकने में माता-पिता की भी अहम भूमिका है। वर्तमान समय में जम्मू- कश्मीर में लगभग 200 आतंकियों के सक्रिय होने का अनुमान है।
सेना की उत्तरी कमान के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल वाईके जोशी ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में सुरक्षाबलों के सटीक अभियानों ने आतंकी समूहों को करारा झटका दिया है। इसी हताशा का कारण है कि आतंकियों ने कुछ नागरिकों को निशाना बनाया। इन घटनाओं को छोड़ दिया जाए तो यहां सुरक्षा की स्थिति काफी हद तक शांतिपूर्ण रही। उन्होंने कहा कि आतंकियों के खिलाफ अभियान आने वाले दिनों में भी जारी रहेंगे।
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कारगिल युद्ध के नायक रहे लेफ्टिनेंट जनरल जोशी ने एक समाचार एजेंसी को दिए साक्षात्कार में कहा कि सेना यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि नागरिक प्रशासन जम्मू-कश्मीर में भय मुक्त वातावरण में काम करे। उन्होंने कहा कि आतंकी तंजीमों की स्थिति काफी खराब है। उनके पास नेतृत्व का संकट है। साथ ही हथियारों, गोला-बारूद, विशेष रूप से स्वचालित हथियारों की काफी कमी है।
यह कारण है कि आतंकवादी छोटे-छोटे हमलों का सहारा ले रहे हैं और वह सुरक्षा बलों के साथ सीधी गोलीबारी से बच रहे हैं। आतंकी समूहों द्वारा स्थानीय युवाओं की भर्ती को कमोबेश पूरी तरह रोक दिया गया है। दक्षिण कश्मीर के तीन जिले ऐसे हैं जहां अभी भी कुछ युवा आतंकियों के चंगुल में फंसकर बहक जा रहे हैं। उत्तरी कश्मीर में स्थित पूरी तरह शांत है।