राज्य जांच एजेंसी (एसआईए) ने हिजबुल मुजाहिदीन के तीन आतंकियों के खिलाफ सोमवार को एनआईए की विशेष अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया। इनमें डोडा के काश्तीगढ़ निवासी आसिफ शब्बीर नाइक, उसके पिता शब्बीर हुसैन नाइक उर्फ खालिद शब्बीर और मरमत के सफदर हुसैन उर्फ एहसान शामिल हैं। खालिद शब्बीर और एहसान दोनों इस वक्त पाकिस्तान से अपनी गतिविधियों को संचालित कर रहे हैं।
एसआईए प्रवक्ता के अनुसार सात नवंबर 2021 को जांच शुरू की गई और छह महीने के भीतर आरोप पत्र दाखिल किया गया। खुफिया इनपुट के आधार पर आसिफ शब्बीर को श्रीनगर एयरपोर्ट पर पाकिस्तान जाते वक्त गिरफ्तार किया गया था। वह पाकिस्तान में अध्ययनरत होने की आड़ में जा रहा था, लेकिन वह वास्तव में आतंकवाद और अलगाववाद की ट्रेनिंग के लिए जा रहा था।
पाकिस्तान में छिपे दो अन्य आरोपी खासकर मास्टरमाइंड शब्बीर हुसैन नाइक व उसके सहयोगी सफदर हुसैन को भगोड़ा घोषित किया गया। जांच में पता चला कि पिता अवैध तरीके से पाकिस्तान गया और हिजबुल मुजाहिदीन सरगना सैयद सलाहुद्दीन का मीडिया सलाहकार बन गया। आसिफ को पाकिस्तानी एजेंसियों ने छात्र होने का न केवल कवच दिया बल्कि पाकिस्तान में उसके पिता से मिलवाने की व्यवस्था भी की। इतना ही नहीं उसे प्रशिक्षण भी दिया गया।
आसिफ के फोन की फोरेंसिक जांच से पता चला कि उसने महत्वपूर्ण सैन्य प्रतिष्ठानों के साथ ही बारामुला श्रीनगर हाईवे की वीडियोग्राफी की थी। उसने हवाई अड्डे की ओर जाने वाले रास्ते और आसपास के इलाकों की सुरक्षा व्यवस्था की भी फोटोग्राफी की थी। आसिफ के पासपोर्ट पर उसके आगंतुक होने का जिक्र था, जबकि आव्रजन (इमिग्रेशन) दस्तावेज में छात्र होने का उल्लेख था।
पूछताछ और डिजिटल दस्तावेजों की जांच से बता चला कि पाकिस्तान ने इस्लामाबाद स्थित अंतरराष्ट्रीय इस्लामिक विश्वविद्यालय में मास कम्युनिकेशन में दिखावे के लिए दाखिले का प्रबंध कराया था। साथ ही उसकी इंटर्नशिप हिजबुल मुजाहिदीन के मीडिया सेल में कराया गया जो उसका पिता संचालित करता था। जांच में यह भी पता चला कि आसिफ जानता था कि उसका पिता पाकिस्तान में है और हिजबुल का बड़ा नाम है। इसके बाद भी उसने झूठी सूचना दी कि वह अपने रिश्तेदार से मिलने जा रहा है।
तीन साल तक पाकिस्तान में हिजबुल कैंप में रहा आसिफ
जांच एजेंसी के अनुसार आसिफ का पाकिस्तान में दाखिला संदेह के घेरे में है। उसका भारत लौटकर पत्रकार बिरादरी में अपने को शामिल करते हुए दुष्प्रचार तंत्र का हिस्सा बनना मकसद था। इसके तहत अलगाववाद और हिंसक आतंकी कार्रवाईयों को प्रचारित करना भी मकसद था। वह तीन साल तक हिजबुल के कैंप में शब्बीर हुसैन नाइक व सफदर हुसैन के साथ रहा।