कठुआ जिले की हीरानगर तहसील के रसाना गांव में आठ साल की बच्ची की सामूहिक दुष्कर्म के बाद हत्या मामले में आरोपी शुभम सांगड़ा के खिलाफ क्राइम ब्रांच ने कठुआ न्यायालय में चार्जशीट दाखिल कर दी है। शुभम को पहले नाबालिग बताया गया था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने शुभम के खिलाफ वयस्क के रूप में अभियोजन चलाने के निर्देश दिए थे। इसके तुरंत बाद शुभम को जुवेनाइल होम से कठुआ जिला जेल शिफ्ट कर दिया गया है।
क्राइम ब्रांच की चार्जशीट के अनुसार शुभम ने आठ साल की बच्ची को दवाओं की ओवरडोज दी ताकि वह दुष्कर्म का विरोध न कर सके। उसे कलोनाजैपम 0.5 एमजी की पांच टेबलेट जबरन दी गईं। चिकित्सा विशेषज्ञ ने इस दवा के असर पर बताया है कि इसके ओवरडोज से बेहोशी, शिथिलता, सांस लेने में परेशानी, कोमा या फिर मौत भी हो सकती है। चिकित्सकों के अनुसार हो सकता है कि ओवरडोज से बच्ची को सदमा लगा हो और वह कोमा में चली गई हो।
शुभम के प्रमाणपत्र के लिए किए गए आवेदन से उसकी उम्र के दावे को गलत साबित किया गया। क्राइम ब्रांच के अनुसार शुभम के पिता ने हीरानगर तहसीलदार कार्यालय में अपने दो बेटों और एक बेटी का जन्म प्रमाण पत्र जारी करने के लिए आवेदन किया था।
पठानकोट की विशेष अदालत ने 10 जून 2019 को फैसले में सांझी राम, एसपीओ दीपक खजूरिया और परवेश कुमार को उम्र कैद की सजा सुनाई थी। तीन अन्य आरोपियों सब इंस्पेक्टर आनंद दत्ता, हेड कांस्टेबल तिलक राज और एसपीओ सुरेंद्र वर्मा को सुबूत मिटाने के आरोप में 50 हजार रुपये जुर्माने के साथ पांच साल की सजा सुनाई थी। यह तीनों पैरोल पर हैं। सातवें आरोपी विशाल जंगोत्रा को अदालत ने बरी कर दिया था।