लद्दाख में केंद्रीय बौद्ध अध्ययन संस्थान के वर्तमान में किसी भी विश्वविद्यालय से संबद्ध न होने के कारण एक हजार से अधिक विद्यार्थियों का भविष्य अधर में है। यह संस्थान 2016 तक वाराणसी के संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय से संबद्ध था, लेकिन वर्तमान में किसी भी विश्वविद्यालय से संबद्धता नहीं है। इसके चलते यहां के विद्यार्थियों की प्री-यूनिवर्सिटी कोर्स नहीं हो पा रहा है।
लद्दाख बुद्धिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष थुपस्तन चिवांग व लद्दाख गोंपा एसोसिएशन के अध्यक्ष वेन शाथुप चंबा ने गुरुवार को उप-राज्यपाल आरके माथुर से मिलकर इस समस्या को उठाया व छात्रों के हितों की सुरक्षा के लिए हस्तक्षेप करने की मांग की।
उप-राज्यपाल ने आश्वस्त किया कि इस मामले के संज्ञान में आते ही प्रशासन ने प्रयास शुरू कर दिए हैं। साथ ही उत्तर प्रदेश के राज्यपाल और संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय की चांसलर आनंदीबेन पटेल के समक्ष भी यह मुद्दा उठाया गया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि जल्द ही इस मसले का हल निकल आएगा। इसके साथ ही प्रतिनिधिमंडल ने लद्दाखी समाज के रोजगार, युवाओं के हित तथा विकास के मुद्दे पर भी बात की।