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General Bipin Rawat: कश्मीर के लोग जनरल रावत की सेवाओं के कायल, लोगों की हर परेशानी में साथ रहे खड़े, सौम्य व्यवहार से सबको बनाया अपना

Thu, 09 Dec 2021 12:40 AM IST
विमल शर्मा अमृतपाल सिंह बाली, श्रीनगर

सार


सीडीएस जनरल बिपिन रावत को उत्तरी कश्मीर में करीब 10 साल तक अपनी अनुभवी सेवाएं प्रदान करने के लिए आज भी स्थानीय लोग याद करते हैं। उनका कहना है कि जनरल रावत हमेशा लोगों के बीच रहते थे, वह लोगों की समस्याएं सुनने के साथ समाधान भी निकालते थे। 
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सीडीएस जनरल बिपिन रावत - फोटो : एएनआई
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विस्तार
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सीडीएस जनरल बिपिन रावत का कश्मीर के साथ एक अलग ही नाता रहा है। अपनी सेवाओं के दौरान वह काफी समय कश्मीर में बिता चुके हैं। उन्होंने कश्मीर में एक ब्रिगेड और इंफेंट्री की भी कमान संभाली थी। उनकी सेवाओं और उनके व्यवहार के लिए आज भी उत्तरी कश्मीर के लोग उन्हें याद कर रहे हैं। 

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उत्तरी कश्मीर में करीब 10 साल तक दी सेवाएं 
उत्तरी कश्मीर में करीब 10 साल तक अपनी अनुभवी सेवाएं प्रदान करने के लिए आज भी यहां के स्थानीय लोग उन्हें याद करते हैं। उनका कहना है कि जनरल रावत हमेशा लोगों के बीच रहते थे, वह लोगों की समस्याएं सुनने के साथ समाधान भी निकालते थे। स्थानीय निवासी साकिब ने बताया कि रावत हमेशा हम स्थानीय लोगों को अपने परिवार की तरह समझते थे।



कभी भी कोई परेशानी या कोई दिक्कत आती थी तो लोग सीधा जनरल रावत के पास जाते थे। साकिब ने बताया कि आज भले ही वह दिल्ली में तैनात थे, लेकिन उनका दिल यहां (उत्तरी कश्मीर) के लोगों के बीच रहता था। उनका यहां के लोगों के साथ लगाव था और उनका नंबर आज भी स्थानीय लोगों के पास था, जो समय-समय पर उनसे बात करते थे।

गोरखा राइफल्स की 5वीं बटालियन में थे नियुक्त 

इतना ही नहीं बारामुला की कोमल जेबी सिंह ने भी अपने ट्वीट में लिखा ‘सभी के लिए दुखद दिन’ खासकर भारतीय सशस्त्र बलों के लिए। सभी शोक संतप्त परिवारों और मित्रों के प्रति गहरी संवेदना है।  बिपिन रावत 16 दिसंबर, 1978 को 11 गोरखा राइफल्स की 5वीं बटालियन में नियुक्त हुए थे, जो उनके पिता का भी यूनिट रहा था।

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आतंकवाद विरोधी अभियानों को किया संचालन 

वह हाई एल्टीट्यूड वारफेयर में काफी अनुभवी थे, जिसके चलते उन्हें कश्मीर और पूर्वोत्तर सेक्टर में कई बार नियुक्त किया गया। इतना ही नहीं उन्होंने आतंकवाद विरोधी अभियानों के संचालन के लिए करीब दस साल बिताए हैं। रावत ने मेजर के रूप में उत्तरी कश्मीर के उड़़ी सेक्टर में एक कंपनी की कमान संभाली।
 

ब्रिगेडियर के पद पर पदोन्नत होकर उन्होंने सोपोर में राष्ट्रीय राइफल्स के पांच सेक्टर की कमान संभाली। वहीं, मेजर जनरल के पद पर पदोन्नति के बाद रावत ने 19वीं इंफेंट्री डिवीजन (उड़ी) के जनरल आफिसर कमांडिंग के रूप में पदभार संभाला।
    
जीवन का सफर...

बता दें कि जनरल रावत ने तीन साल पहले 31 दिसंबर, 2016 को 27वें सेनाध्यक्ष के रूप में पदभार संभाला था। सेना प्रमुख के रूप में नियुक्त होने से पहले रावत एक सितंबर, 2016 से सेना के वाइस चीफ  ऑफ  आर्मी स्टाफ  (वीसीओएएस) के पद पर नियुक्त थे।
 

जनरल बिपिन रावत सेंट एडवर्ड स्कूल शिमला और राष्ट्रीय रक्षा अकादमी खड़कवासला के पूर्व छात्र थे। उन्होंने दिसंबर, 1978 में भारतीय सैन्य अकादमी देहरादून से 11 गोरखा राइफल्स की पांचवीं बटालियन में कमीशन दिया गया था, जहां उन्हें स्वॉर्ड ऑफ  ऑनर से सम्मानित किया गया।
 

जनरल रावत की 38 से अधिक वर्षों की सेवा के दौरान उन्हें वीरता और विशिष्ट सेवा के लिए परम विशिष्ट सेवा मेडल, उत्तम युद्ध सेवा मेडल, अति विशिष्ट सेवा मेडल, युद्ध सेवा मेडल, सेना मेडल, विशिष्ट सेवा मेडल, दो अवसरों पर सीओएएस कमेंडेशन और सेना कमांडर कमेंडेशन के साथ सम्मानित किया गया था।       

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