राज्यपाल एनएन वोहरा ने कहा कि संतुलित वातावरण के लिए मास्टर प्लान के तहत काम किया जाए। पर्यटन विकास के नाम पर अवैध निर्माणों को बढ़ावा दिया जा रहा है।
चढ़ता पारा और गैर पारंपरिक जलवायु परिवर्तन ने गंभीर चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। पिघलते ग्लेशियर, बाढ़, बारिश जैसी आपदाओं का मानव को सामना करना पड़ रहा है।
विश्वविद्यालय आपस में समन्वय मजबूत बनाकर सभी वैज्ञानिक स्रोतों से मिलकर काम करें। बुधवार को जनरल जोरावर सिंह सभागार जम्मू विश्वविद्यालय में शुरू तीन दिवसीय 37वीं इंडियन ज्योग्राफी कांग्रेस में पहुंचे राज्यपाल ने ग्लोबल समस्याओं पर गंभीरता से काम करने पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर में पर्यटन के लिए काफी कुछ है, लेकिन जलवायु परिवर्तन को लेकर संजीदगी से काम करने की जरूरत है।
कश्मीर विश्वविद्यालय में पहली हिमालयन आइस कोर लैब स्थापित करने पर काम हो रहा है। इसमें पिघलते हिमालय ग्लेशियरों पर काम किया जाएगा।
इस दौरान राज्यपाल ने ज्योग्राफी विभाग के पूर्व प्रोफेसर एमएच कुरैशी को आजीवन उपलब्धि अवार्ड से सम्मानित किया गया। इसके अलावा ज्योग्राफी के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले अन्य प्रोफेसरों को भी स्मृति चिह्न और शाल भेंट कर सम्मान दिया गया।
इस तीन दिनी कांग्रेस में ग्लेशियर और जलवायु परिवर्तन, विकसित पर्यटन और राज्य की अर्थव्यवस्था, शहरीकरण, पर्यावरण परिवर्तन, कृषि जनसंख्या, लिंग और स्वास्थ्य सहित अन्य विषयों पर चर्चा की जाएगी। कांग्रेस में विभिन्न विषयों पर अपने अनुभव साझा करने के लिए देशभर से करीब आठ सौ प्रतिनिधि पहुंचे हैं।
कुलपति प्रो. आरडी शर्मा ने कहा कि ऐसे आयोजनों से स्थानीय शोधकर्ताओं और स्कालरों को काफी सीखने को मिलेगा। समारोह में प्रो. पी नाग, प्रो. एससी राय, प्रो. एचएन मिश्रा, प्रो. वीके श्रीवास्तव, प्रो. तलत अहमद, प्रो. वीएस मन्हास, डा. अनुराधा मौजूद रहे।