तवी नदी में चोरी-छिपे मलबा फेंका जा रहा है। इस कार्य को रात के समय अंजाम दिया जा रहा है। शहर के अलग-अलग हिस्सों से ट्राली और टिप्पर नीचे उतरकर मलबा पलट दिया जा रहा है।
कुछ समय पहले ऐसे लोगों पर शिकंजा कसने के लिए सिंचाई विभाग की टीम ने अलग-अलग जगह पर नाके लगाए थे, कुछ लोगों को पकड़ा था और चालान भी काटे थे, जिसके बाद निजी घरों का मलबा फेंका जाना कुछ कम हो गया था, लेकिन अधिकारियों के बदल जाने के बाद दोबारा से यह प्रक्रिया शुरू हो गई।
तवी नदी के अलग-अलग हिस्सों में ठेकेदारों की ओर से तथा कुछ जगह पर निजी घरों का मलबा फेंका जा रहा है, जिससे तवी में प्रदूषण फैल रहा है। साथ में कुछ जगह पर अस्पतालों की गंदगी भी तवी नदी में फेंकी जा रही है, जो कि चिंता का विषय है।
इन दिनों बिक्रम चौक से चौथे पुल की ओर आने-जाने वाले दोनों रास्तों पर सड़क किनारे मलबे के ढेर लगाए जा रहे हैं, वह कब लगा दिए जा रहे हैं, कुछ पता नहीं। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक रात के अंधेरे में कुछ टिप्पर और ट्राली आकर मलबा फेंक रहे हैं।
भगवती के रास्ते से भी नदी में मलबा फेंका जा रहा है। उन्हें कभी कोई पूछने वाला नहीं है, जिस कारण तवी नदी के किनारों पर मलबे के ढेर लग रहे हैं। पुलिस प्रशासन, निगम और जिला प्रशासन भी इसके बारे में कोई एक्शन लेने को तैयार नहीं है।
पीएचई मंत्री चौधरी सुखनंदन का कहना है कि तवी नदी से किसी प्रकार से कोई छेड़छाड़ नहीं जा सकती है। सरकारी या गैर सरकारी किसी भी प्रकार की कंस्ट्रक्शन नहीं हो सकती है और मलबा फेंकना तो किसी जुर्म से कम नहीं है। ऐसी कोई शिकायत या कोई मामला सामने आने पर संबंधित लोगों के खिलाफ एक्शन होगा।