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जम्मू यूनिवर्सिटी: पहले एडमिशन फिर हॉस्टल की टेंशन

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पहले एडमीशन फिर छात्रावास की टेंशन। यह स्थिति रियासत के दूरदराज क्षेत्रों से जम्मू विश्वविद्यालय में पढ़ाई करने पहुंचे विद्यार्थियों की है। ज्यादातर का कहना है कि हम बेहतर शिक्षा के साथ अच्छी सुविधा की उम्मीद कर पहुंचे थे, लेकिन यहां आने के बाद हॉस्टल की व्यवस्था को लेकर काफी मशक्कत करनी पड़ी।
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हॉस्टल सुविधा पर कुछ विद्यार्थियों का यह भी कहना है कि वह चाहते थे कि उन्हें मेन कैंपस में हॉस्टल सुविधा मिले, ताकि ज्यादा समय पढ़ाई में दे सकें। साथ ही लाइब्रेरी का ज्यादा से ज्यादा उपयोग कर सकें। इसके लिए जो शर्तें हैं, उसके काबिल भी थे, लेकिन उन्हें दूरदराज के हॉस्टल लेने के लिए कहा गया। एक विद्यार्थी का कहना है कि जब उसने मेन कैंपस में हॉस्टल के लिए बात की तो उसे भी इसके लिए मना कर दिया गया।

काफी गुहार लगाने के बाद आखिर में उसे कैंपस से बाहर के हॉस्टल लेने पर मजबूर होना पड़ा। इसी तरह से कई अन्य विद्यार्थी हैं, जो काफी मशक्कत करने के बाद विश्वविद्यालय के आसपास किराये के कमरे में रहकर पढ़ाई कर रहे। उनका कहना है कि दूरदराज के हॉस्टल से अच्छा है कि पास में किराये के कमरे में रहकर पढ़ाई की जाए। इससे कम से कम समय तो बचेगा।
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किराये के कमरे में भी गुजर-बसर कर पढ़ रहे स्टूडेंट

वहीं बताया जाता है कि जम्मू यूनिवर्सिटी में छात्रावास की कमी है। मजबूरन जम्मू विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से एडस्टमेंट पालिसी अपना कर विद्यार्थियों को छात्रावास की सुविधा प्रदान की जा रही है। जानकारी के मुताबिक छात्राओं के लिए तीन गर्ल्स हास्टल हैं।

जम्मू यूनिवर्सिटी न्यू कैंपस में तीन व ओल्ड कैंपस में एक ब्वॉयज हास्टल हैं। वहीं जानकारी के अनुसार ब्वॉयज हास्टल में पिछले साल 135 की वेकैंसी थी, जबकि इस साल 112 की वेकैंसी रही। वहीं, गर्ल्स हास्टल की करीब 125 वेकैंसी थीं।

गौर करें, तो डोडा, कि श्तवाड़, भद्रवाह, कठुआ, बसोहली, बिलावर, राजोरी, पुंछ के अलावा बाहरी राज्यों से आने वाले शोध या स्नातकोत्तर छात्र-छात्राओं को आसानी से जम्मू यूनिवर्सिटी में हास्टल की सुविधा नहीं मिल पा रही है। वहीं गर्ल्स हास्टल में चार की जगह पांच अथवा तीन की जगह चार छात्राओं को एडजस्ट कर उन्हें सुविधा प्रदान की जा रही है।

उल्लेखनीय है कि जम्मू यूनिवर्सिटी में गर्ल्स हास्टल की क्षमता 600 के करीब है, जबकि  471 के करीब छात्रों के लिए क्षमता है। हर साल प्रक्रि या के आधार पर एससी-एसटी कैटगरी के आधार अथवा डिपार्टमेंटल मेरिट वाइज विद्यार्थियों को हास्टल की सुविधा मिल पाती है।

हालांकि इस बार मेरिट वाले कुछ विद्यार्थियों को भी मेन कैंपस से बाहर के हॉस्टल में रहने के लिए मजबूर होना पड़ा है। वह बताते हैं कि जो सोच कर एडमीशन लिया था, उस पर पानी फिर गया। पढ़ाई करने के लिए आने-जाने में काफी समय बर्बाद होता है।
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