पिछले एक हफ्ते से क्षेत्र की सीमा पर भले ही शांति हो, लेकिन अब भी दोनों तरफ के किसान दहशत में हैं। वे डरे-सहमें खेतीबाड़ी के काम में जुटे हैं।
इसका कारण है अभी तक फ्लैग मीटिंग का न होना। इस बीच दोनों तरफ के किसानों ने करीब साठ प्रतिशत धान की रोपाई पूरी कर ली है।
सीमांत क्षेत्र के किसान बाबू राम, ओम प्रकाश, प्रयाग चंद, चरण दास, मेला राम का कहना है कि भले ही इस समय हम साठ प्रतिशत धान रोपाई का कार्य पूरा कर चुके हैं, लेकिन अब भी सभी सहमें हैं कि न जाने सीमा पार से कब फायरिंग शुरू हो जाए।
गोलाबारी के बाद अब तक फ्लैग मीटिंग नहीं हुई है। इससे खतरा अभी भी बरकरार है।किसानों का कहना है कि दोनों तरफ इस समय धान रोपाई का काम चल रहा है।
किसान जनक सिंह कहते हैं कि करीब पांच दशक पहले धान रोपाई के समय उनका बैल भी हमारे खेतों में जोताई के दौरान आ जाता था। दोनों ओर के किसानों में कोई गिला शिकवा नहीं होता था।
वहीं सूत्रों की मानें तो गोलाबारी से पहले उस ओर के किसान करीब चालीस प्रतिशत धान रोपाई कर चुके थे।