आतंकियों के खिलाफ मोर्चा लेते जवान
- फोटो : अमर उजाला
विश्लेषकों के अनुसार विकास और रोजगार से नाता जोड़कर उन्होंने युवाओं का दिल जीतने की कोशिश की है। भारी भरकम औद्योगिक निवेश के साथ ही पांच लाख रोजगार के अवसर मुहैया कराए जाने का भरोसा दिलाकर युवाओं को सकारात्मक दिशा देने की कोशिश की। जम्मू और श्रीनगर दोनों ही जगह आयोजित कार्यक्रम में युवा, दहशतगर्दी व विकास केंद्र बिंदु में रहे। विश्लेषकों का कहना है कि उन्होंने कश्मीर केंद्रित नेकां और पीडीपी का नाम लिए बगैर हमले करते हुए इन्हें जम्मू-कश्मीर की बर्बादी के लिए जिम्मेदार ठहराया। जम्मू के साथ भेदभाव न होने का मुद्दा उठाकर उन्होंने भाजपा को बढ़त दिलाने की कोशिश की।
आतंकियों के खिलाफ मोर्चा लेते जवान
- फोटो : अमर उजाला
पुलवामा के लेथपोरा सीआरपीएफ कैंप में रात बिताकर अमित शाह ने बड़ा संदेश दिया है। लेथपोरा में ही 14 फरवरी 2019 को जैश आतंकियों ने सीआरपीएफ काफिले पर फिदायीन हमला किया था जिसमें 40 जवानों ने शहादत पाई थी। इतना ही नहीं, लेथपोरा कैंप में भी दहशतगर्द हमला कर चुके हैं।
आतंकियों के खिलाफ मोर्चा लेते जवान
- फोटो : अमर उजाला
इसके बाद भी उन्होंने कैंप में अन्य जवानों के साथ भोजन किया। उनके साथ संवाद किया और साथ में ही रात बिताई। उन्हें यह अहसास कराने की कोशिश की कि वह उनके मुद्दों के प्रति संवेदनशील हैं। गृह मंत्री अमित शाह के दौरे में यह दूसरा मौका है जब कश्मीर में बंद की कॉल नहीं दी गई। इससे पहले जब वह गृह मंत्री बनने के बाद जून 2019 में श्रीनगर पहुंचे थे तब भी बंद नहीं हुआ था।
आतंकियों के खिलाफ मोर्चा लेते जवान
- फोटो : अमर उजाला
23 से 25 अक्तूबर तक लगातार तीन दिन रहने के बाद भी किसी प्रकार का बंद का आह्वान नहीं किया गया। घाटी में लगभग सभी जगह दुकानें बंद रहीं। अमूमन पहले जब भी कोई प्रधानमंत्री या गृह मंत्री श्रीनगर के दौरे पर आता था तो बंद की कॉल दी जाती थी।