जम्मू-कश्मीर क्रिकेट एसोसिएशन का कामकाज और प्रबंधन का जिम्मा अब बीसीसीआई देखेगी। हाईकोर्ट ने अदालत की ओर से नियुक्त प्रशासक (सीएए) और मुख्य कार्यकारी अधिकारी की सेवाएं समाप्त कर दी हैं। हाईकोर्ट के जस्टिस अली मोहम्मद मागरे और जस्टिस पुनीत गुप्ता की खंडपीठ ने कहा कि बीसीसीआई को सभी हितधारकों, याचिकाएं दायर करने वाले पक्षों से चर्चा करते हुए लोढ़ा कमेटी की सिफारिशों के अनुरूप जल्द से जल्द चुनाव कराने होंगे। चुनाव होने तक यह सारी जिम्मेदारी बीसीसीआई के पास रहेगी।
खंडपीठ ने कहा कि सीएए की ओर से तैयार किए गए मेमोरेंडम आफ एसोसिएशन और रूल्स एंड रेगुलेशन को लेकर मुख्य कार्यकारी अधिकारी की भूमिका संतोषजनक है। अब बीसीसीआई को इन पर अमल करना है। इस पूरी प्रक्रिया में बीसीसीआई को जेकेसीए के पूर्ववर्ती क्लब सदस्यों और सीएए द्वारा गठित की गईं जिला क्रिकेट एसोसिएशन सदस्यों से चर्चा करनी होगी।
लोढ़ा कमेटी की सिफारिशों को ध्यान में रखना होगा। इसके बाद नियमों के तहत जल्द से जल्द चुनाव करवाने होंगे। तब तक व्यवस्था को बीसीसीआई अस्थायी रूप से देखेगी, क्योंकि यह बीसीसीआई का ही अधिकार क्षेत्र है। बीसीसीआई चाहे तो निर्धारित नियमों के तहत जेकेसीए के संविधान में जरूरी प्रावधान जोड़ सकती है।
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ऑडिट रिपोर्ट का इंतजार न करें दोनों प्रदेशों में गतिविधियां कराएं
कोर्ट ने कहा कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख की खेल प्रतिभाओं को किसी भी सूरत में इंतजार न करवाया जाए। क्रिकेट में दोनों प्रदेशाें की प्रतिभाओं को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने के लिए फौरन गतिविधियां और हर संभव प्रयास किए जाएं। इसके लिए किसी तरह की ऑडिट रिपोर्ट का इंतजार करने की जरूरत नहीं है। कोर्ट ने कहा कि भारत में क्रिकेट सामान्य खेल नहीं है। यह एक राष्ट्रीय खेल की तरह है, जिसमें लोगों की भावनाएं जुड़ी हैं। यह पूरे देश को कई मायनाें में जोड़ता है।