रियासत की ग्रीष्मकालीन राजधानी में मंगलवार को जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट के सामने बार एसोसिएशन के सदस्यों ने प्रदर्शन किया गया। इसका नेतृत्व एसोसिएशन के अध्यक्ष अब्दुल क्यूम ने किया। प्रदर्शन के जरिये जेएनयू के छात्र संघ के प्रति एकजुटता व्यक्त की।
हाईकोर्ट परिसर में दोपहर के सदय कई वकील बार एसोसिएशन के बैनर तले एकत्र हुए। इस दौरान उन्होंने जमकर नारेबाजी की। वकीलों ने आजादी के हक में नारे भी लगाए।
इस अवसर पर पत्रकारों से बात करते हुए बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अब्दुल क्यूम ने कहा कि फ्रीडम ऑफ स्पीच का हक हर किसी को है। लोगों को अपनी बात करने का मौका दिया जाना चाहिए। क्यूम के अनुसार आत्मनिर्णय के अधिकार जो संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव में दर्ज है, हमें वह अधिकार दिया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के एक्ट के मुताबिक पहले गुनाह साबित होना चाहिए, फिर गिरफ्तारी होनी चाहिए। इसलिए जेएनयू में गिरफ्तार किए गए लोगों को रिहा किया जाए।
हर किसी को अपनी बात कहने की इजाजत दी जानी चाहिए। नारे लगाना सुप्रीम कोर्ट के मुताबिक जुर्म नहीं है। एसोसिएशन ने प्रोफेसर गिलानी और जेएनयू छात्र संघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार की रिहाई की मांग की।