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महिलाओं के सशक्तिकरण करने के लिए शिविर

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आरएस पुरा। स्कॉस्ट सभागार में उपकुलपति प्रो. जेपी शर्मा ने पशुपालन के माध्यम से महिलाओं के सशक्तिकरण पर दूसरे पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का सोमवार को उद्घाटन किया। प्रशिक्षण कार्यक्रम राष्ट्रीय महिला आयोग की तरफ से प्रायोजित किया गया, जिसमें मुख्य अतिथि के तौर पर उपकुलपति ने प्रतिभागियों को इस प्रशिक्षण कार्यक्रम से अधिक व्यावहारिक और उद्यमशीलता उन्मुख झुकाव के माध्यम से जाने के लिए प्रोत्साहित किया। ताकि वे स्वयं के डेयरी आधारित उद्यम शुरू करके आत्मनिर्भर बन सकें।
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उन्होंने राज्य में दुग्ध उत्पादक संगठन बनाने की आवश्यकता पर बात की। ताकि उत्पादकों को लाभकारी मूल्य मिल सके, और साथ ही उपभोक्ता को उचित मूल्य पर स्वच्छ और ताजा उत्पाद मिल सके। उन्होंने कहा कि कृषक समुदायों की आय और सामाजिक-आर्थिक स्थिति में सुधार के लिए किसानों के स्तर पर उत्पादित कच्ची कृषि का मूल्यवर्धन समय की आवश्यकता है। इस प्रकार के प्रशिक्षण से कृषक समुदाय का मनोबल बढ़ेगा कि वे डेयरी फार्मिंग को रोजगार के स्रोत के रूप में बड़े पैमाने पर अपनाएं।
इससे पूर्व डीन,पशु चिकित्सा विज्ञान और पशुपालन संकाय, आरएस पुरा प्रो. एमएस भड़वाल, ने इस प्रशिक्षण कार्यक्रम के लिए चयनित होने वाले प्रशिक्षुओं को बधाई दी, जो आरएस पुरा के रंगपुर और मोटे गांव से पहुचे थे। उन्होंने प्रशिक्षुओं को पांच दिनों में होने वाली विभिन्न सैद्धांतिक और व्यावहारिक कक्षाओं की जानकारी दी। प्रो. भड़वाल का विचार था कि डेयरी पशु आय, भोजन और पोषण सुरक्षा का एक महत्वपूर्ण स्रोत हैं और वैज्ञानिक प्रबंधन के माध्यम से उत्पादकता में उनके और सुधार, डेयरी किसानों की भलाई में काफी सुधार करेंगे। उन्होंने डेयरी फार्मिंग, वर्मी कंपोस्टिंग, गोबर लॉग बनाने और दूध के मूल्यवर्धन के विभिन्न पहलुओं को इस तरह से सीखने पर जोर दिया कि वे अपना उद्यम शुरू कर सकें।
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प्रो. प्रदीप वाली, निदेशक अनुसंधान,स्कास्ट- जम्मू ने कहा कि इस प्रकार के व्यावसायिक प्रशिक्षण कार्यक्रमों से अधिक सीखने के लिए प्रेरित किया। देश मे महिलाओं ने हमेशा अपने दैनिक घरेलू कामों के अलावा डेयरी और पशुपालन गतिविधियों में भाग लिया। राष्ट्रीय महिला आयोग ने विशेष रूप से पशुधन खेती में प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए इस कार्यक्रम का आयोजन किया है।
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इस अवसर पर डॉ. सुनील कुमार, डॉ. शारद कुमार, डॉ. एके पाठक और डॉ. नजम खान उद्घाटन सत्र में उपस्थित थे।
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