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जम्मू-कश्मीर में 40 लाख लोग बाढ़ की चपेट में

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रियासत में बाढ़ का कहर अब भी जारी है। जम्मू में उतरता पानी संकट बढ़ा रहा है और कश्मीर में पीड़ितों का दर्द बरकरार है। पूरी रियायत में लगभग 40 लाख लोग बाढ़ की चपेट में हैं। लगभग तीन हजार गांवों पर इसका ज्यादा असर है और 600 से अधिक गांव अब भी पूरी तरह बाढ़ के पानी में डूबे हुए हैं।
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अकेले कश्मीर संभाग में 500 गांव जलमग्न हो गए हैं। इस बीच, पूरी रियासत में 40 और लोगों के मरने की खबर है। पंचेरी इलाके में दलदल में धंसे सभी 35 लोगों की मौत हो गई है। प्रशासन ने 27 लोगों के मरने की पुष्टि की है। इस तरह मृतकों की संख्या 220 पर पहुंच गई है। बाढ़ की विभीषिका के बीच सेना, एनडीआरएफ, पुलिस-प्रशासन और अन्य बचाव दल मुस्तैदी से राहत और बचाव कार्य में जुटे हैं।

पहली बार नेवी के कमांडो भी बचाव अभियान में लगाए गए हैं। कश्मीर का देश-दुनिया से संपर्क कट गया है। बचाव दल ने अब तक 35 हजार लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया है। वैष्णो देवी की यात्रा सोमवार की सुबह शुरू हुई जिसे शाम में रोकना पड़ा। हाईवे अब भी बंद हैं। श्रीनगर के बादामीबाग सेना मुख्यालय से 1400 जवानों को परिवार समेत बाढ़ के पानी से बचाकर बाहर निकाला गया है।
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जम्मू में ध्वस्त हुए 15 हजार मकान

कश्मीर से लोगों को बाहर निकालने के लिए जम्मू के पर्यटन विकास निगम में एक विशेष सेल स्थापित किया गया है। सोमवार को श्रीनगर के यूथ हास्टल से फंसे 98 खिलाड़ियों को जम्मू लाया गया। उन्हें सेना के बख्शीनगर कैंप में रखा गया है। जम्मू के डिविजनल कमिश्नर शांतमनु ने अमर उजाला को बताया कि श्रीनगर के लिए जम्मु से फूड पैकेट भेजे जा रहे हैं।

अकेले जम्मू संभाग में 15 हजार मकान ध्वस्त हो गए हैं। कश्मीर संभाग मिलाकार यह संख्या 35 हजार के करीब है। राजोरी बस हादसे में मृतकों के परिवार वालों से डिविजनल कमिश्नर ने सोमावार को मुलाकात की। वहां एक परिवार के 9 लोगों की जानें गईं और परिवार में सिर्फ 12 साल का एक बच्चा बचा है।

फिर शुरू हुई मूसलाधार बारशि

बचाव कार्य के दौरान श्रीनगर के राजबाग में एक नाव पलट जाने से रविवार को दो पोतियों के साथ दादी की मौत हो गई। जबकि एक बच्चे को मुश्किल से बचा लिया गया। सभी किश्तवाड़ के रहने वाले एक ही परिवार के सदस्य हैं। राजोरी जिले में सोमवार की शाम को मूसलाधार बारिश ने फिर कहर ढाना शुरू कर दिया।

भारी बारिश के दौरान मंजाकोट क्षेत्र के हयातपुरा गांव में भूस्खलन से कच्चा मकान ढह गया। इससे मोहम्मद असलम की मलबे में दबने से मौत हो गई। मृतक वन विभाग में गार्ड था। जिले की ही कालाकोट तहसील के मोगला गांव में मकान गिरने से डोडा खान की मौत हो गई।

पूरे कश्मीर में मोबाइल और टेलीफोन सेवा पूरी तरह ध्वस्त हो गई है। बिजली और पानी का संकट है। श्रीनगर शहर के तमाम मोहल्लों में पानी भरा है। लोगबाग घरों की छतों पर आश्रय लिए हुए हैं। सरकारी प्रवक्ता ने 3 जी के 90 टावरों की सेवा बहाल करने का दावा किया है। बीएसएनएल और तमाम निजी आपरेटरों की सेवाएं ठप हैं।

सामने आने लगा तबाही का मंजर

चिनाब दरिया का जलस्तर कम होने के बाद अखनूर में भी तबाही का मंजर सामने आने लगा है। सोमवार को लगातार छठे दिन भी स्टील ब्रिज बंद रहा। वहीं मौसम साफ होने से जनजीवन पटरी पर लौटने लगा है। बारिश से आई बाढ़ ने जमकर कहर बरपाया है। गडखाल में 400 एकड़ भूमि पर लगी फसल भी बर्बाद हो गई है, जबकि सौ के करीब कच्चे मकान और कुल्ले गिर गए हैं।

उधर हमीरपुर कोना के प्रभावित लोग अभी तक सुरक्षित स्थानों से घरों की तरफ नहीं लौटे हैं। यहां बाढ़ से सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है। गुज्जर परिवार को भी काफी नुकसान पहुंचा है। गुड़ा ब्राह्मणा में भी पचास के करीब मवेशियों और 75 कुल्ले बह गए हैं।

उधर एहतियातन स्टील ब्रिज लगातार छठे दिन बंद रहा। दरिया से सटे सीताआला, बकोर, इंद्रीपतन, गडखाल, लहड़िया, भमाल सहित अन्य गांवों में कई एकड़ फसल बर्बाद हुई है। तहसीलदार विजय शर्मा ने कहा कि नुकसान का आकलन किया जा रहा।
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बिजली आपूर्ति बहाल करना चुनौती

बाढ़ और बारिश से बिजली ढांचे को पहुंची भारी क्षति से प्रभावित इलाकों में बिजली सप्लाई करना विभाग के लिए चुनौती बन गया है। प्रभावित इलाकों में जल्द बिजली बहाल होने की फिलहाल संभावना कम ही है। आधिकारिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार पुंछ जिला बिजली सप्लाई से लगातार कटा हुआ है।

132 केवी का टावर गिरने से जिले में बिजली आपूर्ति ठप होकर रह गई है। ज्यौड़ियां में भी 132 केवी का टावर गिरने से बिजली आपूर्ति प्रभावित है। फ्लायं मंडाल क्षेत्र में बिजली का ढांचा क्षतिग्रस्त होने से 60 गांवों में बिजली गुल पड़ी हुई है। छन्नी हिम्मत सेक्टर तीन में करीब पांच ट्रांसफार्मर जलने से बिजली गुल पड़ी हुई है।

वहीं, चौकी चौरा और गुलाबा में 33 केवी रिसीविंग स्टेशनों को नुकसान पहुंचने की वजह से पिछले चार दिनों से 30 गांव अंधेरे में डूबे हुए हैं। इसके अलावा भी बिजली ढांचे और जगह-जगह पर नुकसान पहुंचा है। नुकसान का अभी तक ठीक-ठीक आकलन तक नहीं लगाया जा सका है।

बिजली विभाग के सिस्टम एंड आपरेशन विंग के चीफ इंजीनियर अजय गुप्ता का कहना है कि बिजली ढांचे को भारी नुकसान हुआ है। पूरी तरह से बिजली सप्लाई होने में समय लगेगा।
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