एमनेस्टी इंटरनेशनल ने जम्मू-कश्मीर में मानवाधिकारों के उल्लंघन के मामलों में जवाबदेही तय नहीं किए जाने पर सवाल उठाए हैं।
बुधवार को इस बाबत नई रिपोर्ट जारी करते हुए संस्था ने कहा कि अफस्पा के लागू हुए 25 साल हो जाने के बाद अब भी उदासीनता के कारण दोषियों को बढ़ावा मिल रहा है। इस रिपोर्ट का भारत सरकार की ओर से कड़ा विरोध होने की उम्मीद है।
संस्था के ग्लोबल आपरेशंस के वरिष्ठ निदेशक मीनार पिम्पले ने प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि पांच जुलाई को अफस्पा लागू होने की 25वीं वर्षगांठ है। लेकिन, अभी तक राज्य में तैनात सुरक्षा बल के किसी भी जवान के खिलाफ सिविल कोर्ट में मुकदमा नहीं चलाया गया है।