मनोचिकित्सक डॉ. जगदीश थापा के अनुसार ऑनलाइन स्टडी में एक वर्ग में ऐसे बच्चे हैं मोबाइल, स्मार्ट फोन, डेस्कटॉप, आईपैड से जुड़े हैं। इससे उनका स्क्रीम टाइम बढ़ा है। मोबाइल स्क्रीन से घंटों जुड़े रहने के कारण वह सही ढंग से विश्लेषण नहीं कर पा रहे हैं।
इसके विपरीत बड़ी संख्या में बच्चे ऑनलाइन स्टडी के साथ गेम व अन्य साइटों से जुड़ गए हैं। इससे उनकी स्क्रीन टाइम की आदत बढ़ी है। इन परिस्थितियों में उन्हें मोबाइल से मना करने पर वे गुस्से और तनाव से परेशान हो रहे हैं। उनके अनुसार उनकी क्लीनिक और फोन पर अभिभावक ऑनलाइन स्टडी से जुड़ी अपने बच्चों की ऐसी समस्याओं को लेकर संपर्क कर रहे हैं।
एक वर्ग में ऐसे बच्चे हैं, जिनके पास स्मार्टफोन, लैपटॉप, डेस्कटॉप और आईपैड जैसे स्रोत नहीं हैं और वे ऑनलाइन स्टडी से पिछड़ रहे हैं। ऐसे बच्चों को अपने भविष्य को लेकर चिंता सता रही है। ये बच्चे अधिक डिप्रेशन में जा रहे हैं, उन्हें कुछ सूझ नहीं रहा है।
- घंटों मोबाइल से जुड़े रहने के कारण आंखों पर असर पड़ रहा है
- आंखें लाल होना, देखने में समस्या, सिरदर्द, आंखों में थकावट बढ़ी है
- एक ही जगह कई घंटे बैठे रहने से वजन में बढ़ोतरी हुई है
- असंतुलित डाइट से बच्चों में शारीरिक समस्याएं बढ़ रहीं
क्या करें अभिभावक
अभिभावक ऑनलाइन स्टडी को लेकर एक शेड्यूल बनाएं। इसमें बच्चों को ऑनलाइन एडिक्शन से बचाने के लिए उनकी सुपरविजन करें। जरूरत के मुताबिक ही उन्हें मोबाइल का इस्तेमाल करने दें और यह गतिविधियां अपने सामने करवाएं। ऑनलाइन स्टडी के साथ किताबें भी पढ़ाएं।
शिक्षकों के सामने चुनौती
ऑनलाइन स्टडी को लेकर बच्चों और अभिभावकों के साथ शिक्षक भी परेशान हैं। खासतौर पर सरकारी स्तर पर शिक्षक इसके लिए पूरी तरह से प्रशिक्षित नहीं हैं। अधिकांश स्कूलों में ऑनलाइन सुविधा नहीं है। उन्हें बच्चों को ऑनलाइन स्टडी के बारे में समझाने में मुश्किल हो रही है।