कोविड की तीसरी लहर के धीमा पड़ने के साथ श्री अमरनाथ यात्रा 2022 की तैयारियां तेज कर दी गई हैं। उपराज्यपाल के प्रधान सचिव व श्री अमरनाथ श्राइन बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) नीतीश्वर कुमार ने यात्रा को लेकर आधार शिविर भगवती नगर का दौरा कर सुविधाओं का निरीक्षण किया। इससे पहले गत दिवस वह चंद्रकोट, रामबन स्थित ट्रांजिट कैंप का दौरा किया था।
बताया जाता है कि मंडलायुक्त डा. राघव लंगर विभिन्न विभागों के साथ बैठक कर यात्रा की तैयारियों पर चर्चा की है। जम्मू में आधार शिविर भगवती नगर यात्रियों के लिए मुख्य पड़ाव स्थल रहता है। इसी आधार शिविर से दैनिक आधार पर तड़के यात्रियों को रवाना किया जाता है।
आधार शिविर में एक साथ 1500 से 2000 के बीच यात्रियों को ठहराने की व्यवस्था की जाती है। इसके अलावा शहर के अन्य पड़ाव स्थलों पर भी सैकड़ों यात्रियों को ठहराया जाता है। कोविड की तीसरी लहर के धीमा पड़ने के बाद स्वास्थ्य विभाग के डाक्टरों और अन्य चिकित्सा स्टाफ को भी यात्रा में लगाना तय है।
कश्मीर में यात्रियों की सेवा के लिए देशभर से भी विशेषज्ञ डाक्टर आते हैं। कश्मीर में विभिन्न जिला स्तर पर भी अमरनाथ यात्रा की तैयारियों को लेकर सक्रियता बढ़ाई गई है। इसमें जिला उपायुक्त सभी प्रबंधों को यात्रा से पूर्व पूरा करने पर जोर दे रहे हैं।
पिछले दो सालों से कोविड के कारण यात्रा को रद्द किया गया था। इस साल यात्रियों के पड़ाव स्थलों के विस्तार करने के साथ अन्य बुनियादी ढांचे को मजबूत बनाया जा रहा है। इस बार यात्रा में रिकार्ड यात्रियों के आने की उम्मीद है।
अमरनाथ यात्रियों को इस बार श्रीनगर से ही हेलिकॉप्टर सेवा
कोविड की तीसरी लहर के धीमा पड़ने के साथ श्री अमरनाथ यात्रा 2022 की तैयारियां तेज कर दी गई हैं। इस बार भोले के भक्तों को श्रीनगर से हेलिकॉप्टर सेवा देने की तैयारी की जा रही है। श्रीनगर से नीलग्राथ और पहलगाम के लिए सीधी हेलिकॉप्टर सेवा शुरू की जाएगी। इसके साथ पहले के रूट में नीलग्राथ और पहलगाम से भी हेलिकॉप्टर सेवा जारी रहेगी। इसके लिए श्री अमरनाथ श्राइन बोर्ड ने उपरोक्त रूटों पर वर्ष 2022 और 2023 के लिए पंजीकृत विमानन कंपनियों से निविदाएं मांगी हैं।
हेलिकॉप्टर के नए रूट में श्रीनगर-नीलग्राथ-श्रीनगर और श्रीनगर-पहलगाम-श्रीनगर सेक्टर शामिल होंगे। बोर्ड की ओर से 15 मार्च तक निविदाएं मांगी गई हैं। पंजीकृत विमानन कंपनियों के पास न्यूनतम तीन लाइट हेलिकॉप्टर होने चाहिए। कंपनियों को श्रीनगर रूट के लिए 30 लाख रुपये सिक्योरिटी जमा करनी होगी। इसमें कंपनी को न्यूनतम पांच साल की उड़ानों का अनुभव होना चाहिए और उसके पायलटों को न्यूनतम पर्वतीय उड़ानों में 1500 घंटों का अनुभव होना जरूरी है। इसी तरह पहले के रूट में लोअर पवित्र गुफा-नीलग्राथ और पहलगाम-पंजतरणी-पहलगाम के लिए भी हेलिकॉप्टर सेवा जारी रहेगी। इस रूट के लिए 25 फरवरी तक निविदाएं मांगी हैं।