नियंत्रण रेखा पर तैनात जवानों के अनुसार जब इलाके में बर्फ होती है तो उस दौरान घुसपैठियों को पहचानना आसान होता है और जैसे ही बर्फ पिघल जाती है तो हरियाली और घने जंगलों के चलते चुनौतियां और बढ़ जाती हैं। जानकारी के मुताबिक लश्कर और जैश को फिर गतिविधियों में तेजी लाने को कहा गया है। घाटी में सुरक्षाबलों के ताबड़तोड़ आतंकी विरोधी अभियानों ने इनकी जड़ें कमजोर कर दी हैं।
एलओसी पर नजर बनाए रखने के लिए फिजिकल सर्विलांस मौजूद
दुश्मन की किसी भी हरकत को नाकाम बनाने के लिए नियंत्रण रेखा पर पैनी नजर जमाए हवलदार अमित कुमार बताते हैं कि बर्फ पिघलने के बाद उनके लिए चुनौतियां बढ़ जाती हैं। घुसपैठ की कोशिशें बढ़ जाती हैं, इसके साथ ही सेन की रणनीति भी बदलती रहती है। बदलते मौसम और स्थिति के अनुसार सेना नियंत्रण रेखा पर काउंटर इंफिल्ट्रेशन ग्रिड तैयार करती है। एलओसी पर नजर बनाए रखने के लिए फिजिकल सर्विलांस के अलावा नवीनतम उपकरणों का भी उपयोग किया जाता है। इनमें थर्मल इमेजर्स, पीटूजी कैमरा, नाईट विजन डिवाइस आदि शामिल होते हैं।
एलओसी पर आधुनिक तारबंदी के साथ कैमरा व लाइट्स भी
बता दें कि नियंत्रण रेखा पर करीब 20 फुट तक बर्फबारी के चलते एलओसी पर लगाई गई फेंसिंग को भी क्षति पहुंचती है। सूत्रों के मुताबिक करीब 60 प्रतिशत फेंसिंग को नुकसान पहुंचता है जिसको ठीक करने का काम भी बर्फ पिघलने के बाद ही शुरू होता है। इस दौरान भी आतंकियों के लिए घुसपैठ आसान हो जाती है। सेना के एक अधिकारी के अनुसार अब जो फेंसिंग लगाई जा रही है वो एडवांस हैं, जिसे एक तो आतंकियों के लिए कटर से काटना काफी मुश्किल है और साथ ही बर्फ से भी नुकसान होने की संभावना बहुत कम है। फेंसिंग पर लाइट्स के साथ साथ थर्मल कैमरा भी उन जगहों पर लगाए गए हैं जो जवानों की नजरों से ओझल हैं।
आतंकियों के लिए आसान नहीं घुसपैठ करना
हवलदार अमित ने बताया कि रात के पेट्रोलिंग के साथ-साथ संतरी ड्यूटी को भी बढ़ाया जाता है। पारंपरिक घुसपैठ का रास्ता होने के चलते बर्फ पिघलने के साथ ही उस पार बैठे आतंकियों की यह कोशिश रहती है कि ज़्यादा से ज़्यादा इस पार आ सकें, लेकिन इस बार अभी तक ऐसा कुछ देखने को नहीं मिला है, क्योंकि जवान पहले से भी पूरी तैयारी के साथ सतर्क हैं। अत्याधुनिक हथियार और सर्विलांस के कारण घुसपैठ आसान नहीं रह गई।
केरन सेक्टर में सबसे ज्यादा सतर्कता
एक अन्य जवान उमेश कौशिक के अनुसार हमारे पास आधुनिक हथियार और सर्विलांस उपकरण हैं जिससे हम आतंकियों के नापाक मंसूबों को नाकाम बनाते हैं। जब कभी इनपुट रहता है तो हम चौकसी और बढ़ा देते हैं। केरन में सब से ज्यादा सतर्कता बरती जा रही है, क्योंकि बताया जा रहा है कि उस पार नीलम घाटी में सब से ज्यादा लांच पैड हैं।
पाकिस्तान से सटी भारतीय सीमा
पिछले साल घुसपैठ की तीन कोशिशें नाकाम
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक पिछले वर्ष केवल 5 घुसपैठ की कोशिशें हुई हैं, जिनमें से 3 को असफल कर दिया गया था और जो घुसने में सफल रहे उन्हें बाद में मुठभेड़ों में ढेर कर दिया गया। आतंक विरोधी अभियानों के कारण तीस सालों में पहली बार जीवित आतंकियों की संख्या 200 से कम हुई है। पिछले वर्ष 184 आतंकी मारे गए थे। इस वर्ष की बात करें तो जनवरी से लेकर अब तक आतंकियों और सुरक्षाबलों के बीच 40 मुठभेड़ हुई हैं जिनमें 59 आतंकी ढेर किए गए हैं और 30 को जिंदा पकड़ा गया है। इसके अलावा अब तक 169 आतंकी समर्थक पकड़े गए हैं।
लोग बोले, सेना हर मुसीबत में मददगार
केरन सेक्टर के करीब रहने वाले स्थानीय लोगों का कहना है कि सेना न हो तो उनकी जिंदगी कुछ भी नहीं है। स्थानीय निवासी राजा सुहेल अहमद खान ने कहा, हम सेना के शुक्रगुजार हैं जो चौबीस घंटे किसी भी मुसीबत में सेना मदद करती है। कई बार बर्फबारी में सड़क बंद होने के चलते सेना हमारे मरीज को कंधे पर उठाकर अस्पताल पहुंचाती है। पहले जब गोलाबारी होती थी तो सेना लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाती थी।