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सरकारी मंडियों में नहीं पहुंच रही गेहूं की फसल

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सांबा सरकारी गेहुं खरीद मंडी का दृष्य - फोटो : SAMBA
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सांबा। जिले में सरकार की ओर से किसानों के लिए खोली गई गेहूं खरीद मंडियों में किसानों का रुझान कम होता जा रहा है। किसान पूर्व सरपंच भारत इंदु शर्मा, किसान राज कुमार, केवल आदि ने बताया कि सरकारी मंडियों में गेहूं का दाम कम होने कारण किसान मंडियों की ओर रुख नहीं कर रहे हैं।
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उन्होंने बताया कि मंडियों में गेहूं का दाम 2025 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है, जबकि निजी व्यापारी किसानों के खेत में ही 2050 से 2100 रुपये तक दाम दे रहे हैं। इस कारण किसान मंडियों के बजाय व्यापारियों को अपनी फसल बेच रहे हैं। किसानों के अनुसार मंडी जाने पर पहले पटवारी से नकल लेने के लिए कई-कई चक्कर लगाने पड़ते हैं। वहीं बाद में कृषि विभाग के पास आईडी बनवानी पड़ती है। उसके बाद किसान के खाते में धन जमा होता है।
इन औपचारिकताओं कारण भी किसान मंडियों से दूर हो रहे हैं। कृषि विभाग के अनुसार गत वर्ष मंडियों में गेहूं की फसल का काफी कारोबार रहा था। उधर किसानों ने मांग उठाई है कि सरकारी गेहूं खरीद मंडी में फसल का दाम बढ़ाया जाए या पंजाब की तर्ज पर प्रति क्विंटल 200 रुपये किसान को बोनस दिया जाए। ताकि किसानों को उचित दाम मिल सके।
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गत वर्ष सरकारी गेहूं मंडी में 30 हजार क्विंटल गेहूं की फसल किसानों ने बेची थी। इस वर्ष लक्ष्य दुगना था, लेकिन दस दिन के भीतर केवल 850 क्विंटल गेहूं ही मंडी में पहुंचा है। अधिक फसल निजी व्यापारियों के पास बेची जा रही है।
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सरकार की मंशा है किसानों को अच्छे दाम दिलाना। यदि व्यापारी किसानों को अच्छा दाम दे रहे हैं तो अच्छी बात है। सरकार ने मंडियों में सरकारी दाम तय किए हैं, ताकि इससे कम किसानों को दाम न मिले। यदि मंडियों से व्यापारी किसान की फसल का अच्छा दाम दे रहे हैं तो अच्छा है। कम से कम किसानों को लाभ मिल रहा है।
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-संजे वर्मा, मुख्य कृषि अधिकारी, सांबा
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