जम्मू-कश्मीर में अगले पांच वर्ष में वार्षिक कृषि निर्यात को मौजूदा 190 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 3000 करोड़ रुपये करने का लक्ष्य रखा गया है। कृषि निर्यात को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने पहचान की संभावित निर्यात योग्य कृषि वस्तुओं के लिए एक व्यापक निर्यात प्रोत्साहन नीति तैयार करने को एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया है।
समिति का प्राथमिक कार्य वस्तु विशिष्ट निर्यात प्रोत्साहन सिफारिशों को विकसित करना होगा। इसमें अन्य बातों के साथ निर्यात के रणनीतिक और परिचालन पहलू शामिल होंगे। इसके साथ अंतिम रूप देने और जमीनी स्तर पर कार्यान्वयन के लिए एक माह में कृषि उत्पादन विभाग को सभी आवश्यक तकनीकी इनपुट प्रदान करेगी।
नई नीति प्राचीन कृषि जलवायु परिस्थितियों, विशिष्टता और निकट जैविक गुणवत्ता के लिए ब्रांड जेएंडके को बढ़ावा देगी। इसमें यूटी निर्यात आधार में विविधता लाने के साथ किसानों को पर्याप्त निर्यात अवसरों के साथ सशक्त बनाया जाएगा। नीति जम्मू कश्मीर से निर्यात कृषि वस्तुओं के लिए परिवेशी पारिस्थितिकी तंत्र बनाएगी।
यह नीति जीआई टैगिंग, प्रसंस्करण, कड़े गुणवत्ता नियंत्रण, अंतरराष्ट्रीय प्रमाणन, पता लगाने की क्षमता, ब्रांडिंग और विपणन पर ध्यान केंद्रित करेगी। मांग आधारित आपूर्ति गतिविधि के लिए केवल कटाई और स्थानीय स्तर पर उपज की बिक्री के दृष्टिकोण में एक आदर्श बदलाव लाने पर जोर
दिया जाएगा।
नए बाजार तक बढ़ाई जाएगी पहुंच
नीति के तहत दस्तावेजों के साथ निर्यात संवर्धन संगठनों, व्यापार संवर्धन संगठनों, राष्ट्रीय स्तर के संस्थानों, अनुसंधान संस्थानों, विश्वविद्यालयों, प्रयोगशालाओं और निर्यातकों आदि द्वारा सहयोग के माध्यम से नए बाजारों तक पहुंच बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। इसके साथ गुणवत्ता नियंत्रण सेटअप स्थापित करने, राष्ट्रीय/अंतरराष्ट्रीय प्रमाणन, जीआई, परिवहन और विपणन सहायता की स्थापना में भी सहायता प्रदान की जाएगी।
इसमें सेब, बासमती चावल, अखरोट, बादाम, चेरी, केसर, लाल मिर्च, लहुसन, शहद, ऊन, रेशम, दालें, लैवेंटर, एरोमेट्रिक पौधे आदि शामिल होंगे। कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीईडीए) की सेवाओं का भी परिकल्पित लक्ष्यों को प्राप्त करने में उपयोग किया जाएगा। यह निर्यात प्रोत्साहन के माध्यम से कृषि उपज का मुद्रीकरण करेगा और जम्मू कश्मीर की कृषि अर्थव्यवस्था में एक नया आयाम जोड़ेगा।