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एम्स को लेकर वकीलों ने खोला बड़ा मोर्चा, नहीं करेंगे कामकाज

Fri, 24 Jul 2015 12:44 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, जम्मू
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निर्धारित समय सीमा में केंद्र सरकार की ओर से जम्मू के लिए आल इंडिया इंस्टीट्यूट आफ मेडिकल साइंसेज (एम्स) की घोषणा न किए जाने के विरोध में वकील एक सप्ताह तक अदालती कामकाज में भाग नहीं लेंगे। हाईकोर्ट कांप्लेक्स स्थित बार चैंबर में हाईकोर्ट बार एसोसिएशन की जनरल हाउस मीटिंग में उक्त फैसला लिया गया, जिसमें 500 से ज्यादा वकील शामिल थे। निर्णय के अनुसार वकील 24 से 30 जुलाई तक अदालती कामकाज का सस्पेंड रखेंगे।
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आंदोलन की अगली रणनीति तय करने के लिए एम्स कोआर्डिनेशन कमेटी के कोर ग्रुप की बैठक शुक्रवार को होगी।
जनरल हाउस की मैराथन मीटिंग में बार सदस्यों ने भाजपा नेतृत्व को जम्मू की जनता के साथ धोखा करने का आरोप लगाया। वक्ताओं ने कहा कि जनता ने भाजपा को भारी जनादेश दिया। उन्हें उम्मीद थी कि भाजपा सत्ता में आई तो जम्मू के साथ भेदभाव समाप्त होगा। लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ।

भाजपा ने लोगों को एम्स हासिल करने के लिए सड़कों पर उतरने को मजबूर किया। इस दौरान एम्स कोआर्डिनेशन कमेटी के चेयरमैन अभिनव शर्मा ने कहा कि भाजपा को इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी।
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शर्मा ने हाउस को बताया कि 130 सिविल सोसाइटी संगठनों और व्यापार, ट्रांसपोर्ट और उद्योग के प्रतिनिधि एम्स कमेटी के साथ संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कमेटी प्रस्तावित एम्स को हासिल करके छोड़ेगी। बार के पूर्व प्रेसीडेंट व सीनियर एडवोकेट बीएस सलाथिया ने अथारिटी पर आरोप लगाया कि एम्स के चल रहे जोरदार आंदोलन को कमजोर करने के उद्देश्य से भाजपा जम्मू, राजोरी और किश्तवाड़ में सांप्रदायिक तनाव फैला रही है।
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