जम्मू। आतंकवाद ग्रस्त और अति संवेदनशील जम्मू-कश्मीर में फर्जी गन लाइसेंस का रैकेट देश का सबसे बड़ा रैकेट है। यहां चार सालों में साढ़े चार लाख लाइसेंस जारी कर दिए गए। इनमें आधे से ज्यादा लाइसेंस फर्जी निकले हैं। लाइसेंस की बंदरबांट का अनुमान इसी बात से लगाया जा सकता है कि लाइसेंस आवेदक को सेना और बीएसएफ का पूर्व कर्मी दर्शाकर बाकायदा यूनिफार्म के साथ फोटो जमा करवाई गई। भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान रहे महेंद्र सिंह धोनी के नाम से भी गन लाइसेंस के लिए आवेदन किया गया था, हालांकि उनके आवेदन को खारिज कर दिया गया था।
अफसरों और गन डीलरों की मिलीभगत इस कदर हुई कि कारोबारी, माफिया और अन्य को बीएसएफ और सैन्य कर्मी बताकर लाइसेंस जारी कर दिए गए। वर्ष 2012 से लेकर 2016 तक कुपवाड़ा, बारामुला, उधमपुर, राजोरी, डोडा, रामबन समेत अन्य जिलों से 4 लाख 49 हजार लाइसेंस जारी हुए। इनमें से 2 लाख 78 हजार लाइसेंस फर्जी पाए गए। चार सालों में जारी लाइसेंसों में आधे से ज्यादा फर्जी होना एक बड़ा रैकेट है। यही कारण है कि 2018 में सीबीआई को इस मामले की जांच सौंपी गई। जानकारी के अनुसार उधमपुर से 36 हजार लाइसेंस जारी हुए। कुपवाड़ा से 56 हजार फर्जी लाइसेंस जारी हुए। उधमपुर, डोडा और रामबन के तीन जिलों से सवा लाख ऐसे लोगों को लाइसेंस जारी हुए हैं, जोकि जम्मू-कश्मीर से बाहर के रहने वाले हैं। इस रैकेट में आईएएस अधिकारी राजीव रंजन के भाई समेत 50 लोगों को राजस्थान एसटीएस ने गिरफ्तार किया था। भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान रह चुके महेंद्र सिंह धोनी भी जम्मू-कश्मीर में अपने गन लाइसेंस के लिए आवेदन कर चुके हैं, हालांकि उनको लाइसेंस नहीं दिया गया था।
गन डीलरों से लेकर चपरासी तक शामिल
सूत्रों का कहना है कि फर्जी गन लाइसेंस में करोड़ों रुपये का खेल हुआ है। दिल्ली, मध्य प्रदेश, राजस्थान, गुड़गांव, नोएडा, पंजाब और जम्मू-कश्मीर में 72 से ज्यादा लोग ऐसे थे, जिन्होंने अफसरों से लेकर चपरासियों तक के साथ मिलीभगत की और हर एक लाइसेंस 10 से 12 लाख रुपये में बेचा गया। यहां तक कि गन डीलरों ने लाइसेंस रिन्यू कराने तक का ठेका ले रखा था। जम्मू के रेलवे स्टेशन स्थित पुलिस ने छापा मारकर एक गन डीलर से 500 लाइसेंसों के दस्तावेज बरामद किए थे।