कश्मीर घाटी में मौसम में बेवक्त बदलाव को विशेषज्ञ काफी गंभीरता से लेकर चिंता व्यक्त कर रहे हैं। विशेषज्ञ स्वीकार कर रहे हैं कि इस दिशा में जब तक सरकार कोई ठोस कदम नहीं उठाती तब तक ऐसे बदलाव पर रोक लगाना संभव नहीं हो सकता।
घाटी में जून के महीने में बारिशों का होना और तापमान में लगातार हो रही गिरावट को असामान्य बदलाव माना जा रहा है। इससे न सिर्फ स्थानीय लोग बल्कि घाटी के विशेषज्ञ काफी परेशान दिख रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार सर्दियों जैसा मौसम घाटी में पर्यावरण में आ रहे बदलाव का परिणाम है।
कश्मीर विश्वविद्यालय केअर्थ साइंस विभाग के हेड शकील अहमद रोमशू के अनुसार विशेषज्ञ जिन 28 संकेतों को पर्यावरण में बदलाव के पीछे मुख्य कारण मानते हैं उनमें 19 संकेत कश्मीर में पाए जा रहे हैं।
ज्यादा बारिश, गर्मियों में सामान्य से कम तापमान, सर्दियों में ज्यादा तापमान, ओलावृष्टि में बढ़ोतरी आदि कई ऐसे संकेत हैं। उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि कश्मीर की भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि तापमान में हल्का सा उतार-चढ़ाव कोई बड़ा बदलाव का कारण बन सकता है जिससे न सिर्फ कृषि और पर्यटन पर असर पड़ेगा बल्कि पानी की किल्लत भी परेशानियों का सबब बन सकती है।