कुपवाड़ा में तैनात संजय कुमार ने कहा कि वह सुरक्षा के अभाव वाले स्थान पर काम नहीं कर सकते। सरकार मांगों को नहीं मानती है, तो हम सामूहिक त्यागपत्र देंगे। हम कश्मीर में रोजगार के लिए गए हैं, लेकिन जान से ज्यादा कुछ नहीं। रजनी बाला, राजेश कुमार, राहुल भट्ट की हत्या के बाद भी सरकार कर्मचारियों के दर्द को समझ नहीं रही है। कश्मीर संभाग में हालात सामान्य होने तक वह ड्यूटी पर नहीं जाएंगे। पीएम पैकेज के तहत नियुक्त कर्मचारी को पुनर्वास योजना के तहत कश्मीर में तैनात किया गया है, लेकिन हमारा मामला अलग है।
कश्मीर में लक्षित हत्याओं के बाद कश्मीरी पंडितों को सुरक्षित स्थानों पर तबादला करने की प्रक्रिया जारी है। अब 177 कश्मीरी पंडितों को जिला मुख्यालयों पर भेजा गया है। पहले भी 80 का तबादला किया गया था। सरकार ने इस मामले में साफ तौर पर कहा कि छह जून तक इन कर्मचारियों को जिला मुख्यालयों पर स्थानांतरित कर दिया जाएगा। ज्ञात हो कि शुक्रवार को नई दिल्ली में गृह मंत्री की अध्यक्षता में हुई उच्च स्तरीय बैठक में साफ कहा गया है कि कश्मीरी पंडित कर्मचारियों का घाटी से बाहर तबादला नहीं होगा। आठ सेफ जोन बनाए जाएंगे जहां इनकी तैनाती होगी।
जिला उपायुक्त और निदेशक शिक्षा विभाग के निर्देशानुसार प्रधानमंत्री पैकेज के अधीन कार्यरत 177 कश्मीरी पंडित शिक्षकों को जिला मुख्यालय के अंतर्गत आने वाले नजदीकी जगहों पर स्थानांतरित किया गया है। इसकी सूची व्हाट्सएप और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रसारित की जा रही है। भाजपा प्रवक्ता अल्ताफ ठाकुर ने कहा कि स्थानांतरण सूची सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सार्वजनिक करना सुरक्षा के लिहाज से उल्लंघन है। आतंकियों को स्पष्ट पता चल गया है कि कौन कहां तैनात है। इस पर कड़ा संज्ञान लिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि एक तरफ सरकार कश्मीरी पंडितों की सुरक्षा के लिए गंभीर कदम उठा रही है, वहीं कुछ अधिकारी जानबूझ कर हालात बिगाड़ रहे हैं।