कोविड की दूसरी लहर के दौरान पीएम केयर्स के तहत श्रीनगर के एसएमएचएस और अन्य दूसरे चिकित्सा संस्थानों को भेजे गए सभी 165 वेंटिलेटर खराब पाए गए हैं। बताया जा रहा है कि उच्च क्षमता वेंटिलेटर न होने की वजह से मरीजों को इनका लाभ नहीं मिला पाया और अधिकांश वापस भेजे गए। इसका खुलासा सरकारी मेडिकल कालेज श्रीनगर के जन सूचना अधिकारी की ओर से एक आरटीआई के जवाब में हुआ है। वहीं, जम्मू-कश्मीर चिकित्सा आपूर्ति निगम का कहना है कि आपात स्थिति को देखते हुए ज्यादा संख्या में भेजे गए यह वेंटिलेटर लो एंड के थे, जिनमें सीमित सुविधाएं होती हैं।
मरीजों की जान को बना रहता था खतरा
इसके अलावा दमन-3 के 125 वेंटिलेटर डीआरडीओ अस्पताल खोनमोह श्रीनगर में भेजे गए, इसमें 2 वेंटिलेटर एसएमएचएस अस्पताल में लाए गए। लेकिन सभी वेंटिलेटर में तकनीकी खराबी आई। ये टिडाल वाल्यूम सृजित नहीं कर सके। इन वेंटिलेटर से मरीज को फ्लो 2 नहीं दिया जा सका। ये वेंटिलेटर आटोमेटिक बंद हो जाते थे, जिससे मरीजों की जान को खतरा बना रहता था। अगवा वेंटिलेटर की ओर से अन्य 22 वेंटिलेटर अंडर ट्रायल हैं। जवाब में वेंटिलेटर प्रबंधन के लिए श्रम शक्ति में नर्सिंग अर्दली, सेनेटरी कर्मियों की कमी बताई गई है।
वेंटिलेटर के लिए सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत सामाजिक कार्यकर्ता बलविंदर सिंह की ओर से आरटीआई दी गई थी। वहीं, जम्मू कश्मीर मेडिकल सप्लाई कारपोरेशन के एमडी डॉ. यशपाल शर्मा का कहना है कि कोविड के दौरान पीएम केयर फंड के तहत लो एंड के वेंटिलेटर भी भेजे गए थे, जबकि हाई एंड के वेंटिलेटर में सभी सुविधाएं होती हैं। लो एंड के वेंटिलेटर में सीमित सुविधाएं होती हैं। इनमें हाई फ्लो आक्सीजन सहित अन्य सुविधाएं शामिल थीं।
पीएम केयर्स फंड में सबसे बड़ी ठगी: महबूबा
पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने पीएम केयर्स फंड को भ्रष्टाचार का तरीका बताया है। उन्होंने कहा कि पीएम केयर फंड के तहत जम्मू-कश्मीर में लाए गए घटिया स्तर के वेंटिलेटर से भ्रष्टाचार सामने आया है। ऐसे वेंटिलेटर न सिर्फ कश्मीर में खराब पाए गए, बल्कि गुजरात में भी ऐसे मामले आए हैं। सरकार जम्मू-कश्मीर में हालात सामान्य होने के दावे कर रही है, जबकि जमीनी स्तर पर हालात अलग हैं।