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Udhampur News: ''दीदी की रसोई'' से लगे स्वरोजगार को पंख, अब नहीं रहेगा हाथ तंग

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उधमपुर। जिला प्रशासन और डिस्ट्रिक्ट अर्बन डेवलपमेंट एजेंसी उधमपुर की ओर से महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में शुरू की गई ''दीदी की रसोई'' कैंटीन पहल से कई महिलाओं के स्वरोजगार को पंख लगे हैं। इससे अब पैसे के मामले में उनका हाथ तंग नहीं रहेगा।
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इन कैंटीनों में किफायती दामों पर घर का बना विभिन्न प्रकार का भोजन उपलब्ध है। इनका संचालन दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन के तहत बनाई गई महिला स्वयं सहायता समूहों की ओर से किया जा रहा है। इस पहल का उद्देश्य राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन (एनयूएलएम) महिला स्वयं सहायता समूहों की व्यावसायिक गतिविधियों को प्रोत्साहित करना और आम जनता को किफायती व पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराना है।
अभी तक उधमपुर में इस तरह की तीन ''दीदी की रसोई'' कैंटीन खोली गई हैं। ये राजकीय महिला काॅलेज, डीसी ऑफिस परिसर और राजकीय डिग्री काॅलेज बाॅयज में हैं। प्रत्येक में एक संचालिका और एक सह संचालिका के रूप में स्वयं सहायता समूह की दो महिलाएं स्वरोजगार हासिल कर आत्मनिर्भर बन रही हैं। इनको प्रशासन और डूडा की तरफ से हरसंभव सहायता भी मुहैया करवाई गई है। कैंटीन चलाने वाली महिलाएं स्वरोजगार हासिल कर खुश हैं और अपनी आजीविका से परिवार के पालन पोषण में सहायक बनने पर खुद को गौरवान्वित महसूस कर रही हैं।
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पहले बाहर निकलकर काम करने में झिझक थी और कुछ डर भी था कि पता नहीं हमसे काम हो भी पाएगा या नहीं लेकिन साहस जुटाकर जब बाहर आई हैं तो हमें खुद पर गर्व है कि हम भी किसी से कम नहीं हैं। हम अपने परिवार के पालन पोषण करने में सहायक बन रही हैं। प्रशासन और डूडा की तरफ से ''दीदी की रसोई'' एक सराहनीय पहल है। इससे हम जैसी जरूरतमंद महिलाओं को सम्मान से आजीविका कमाने और आत्मनिर्भर बनने का मौका मिल रहा है। अन्य महिलाओं को भी यही संदेश है कि खुद को आत्मनिर्भर बनाएं।
-संतोष, संचालिका ''दीदी की रसोई'' डीसी कार्यालय परिसर
कैंटीन के लिए किसी तरह की कोई परेशानी नहीं हुई। डूडा की ओर से ऑफर दिया गया, जिसे कई महिलाओं ने झिझक के कारण छोड़ दिया लेकिन हमने घर की आर्थिक हालत को सुधारने का इरादा लेकर इसे चलाने की हामी भरी। शुरुआत में कुछ परेशानी थी लेकिन अब अच्छे तरीके से कैंटीन चल रही है। कमाई भी ठीक है, जिससे परिवार को भी आर्थिक सहारा मिल रहा है। सभी महिलाओं से अपील है कि डर और झिझक को छोड़कर बाहर निकलें और आत्मनिर्भर बनकर अपने और अपने परिवार का सहारा बनें। सरकार और प्रशासन की तरफ से जरूरतमंद महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में किए जा रहे इस तरह के प्रयास सराहनीय हैं।
-आशू देवी, सह संचालिका ''दीदी की रसोई'' डीसी कार्यालय परिसर
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जिला प्रशासन के सहयोग से डिस्ट्रिक्ट अर्बन डेवलपमेंट एजेंसी जिले में और भी कई कैंटीन खोलने की तैयारी में है। जल्द ही रामनगर में भी एक नई ''दीदी की रसोई'' खोली जाएगी। यह जरूरतमंद महिलाओं के लिए स्वरोजगार का एक सुनहरा अवसर है। अधिकतर कैंटीन सरकारी कार्यालयों व परिसरों में स्थापित की जा रही हैं, जो पूर्णतया सुरक्षित हैं। घर से बाहर निकलकर काम करने की हिचकिचाहट के कारण काफी कम संख्या में महिलाएं ये कैंटीन चलाने में दिलचस्पी दिखा रही हैं लेकिन हमारा प्रयास है कि ज्यादा से ज्यादा महिलाएं इस अवसर का लाभ उठाकर खुद को आत्मनिर्भर बनाएं।
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-जफर अब्बास बट प्रोजेक्ट अधिकारी डूडा
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