संवाद न्यूज एजेंसी
उधमपुर। राष्ट्रीय राजमार्ग स्थित मांड गांव में वीरवार को एक जनसभा में पूर्व विधायक रणबीर सिंह पठानिया ने 2012 में अधिग्रहित भूमि वाले परिवारों को मुआवज़ा देने में 13 साल की बेवजह की देरी की कड़ी आलोचना की।
पठानिया ने तीखे सवाल उठाते कहा कि 13 साल बाद भी प्रभावित भूमि मालिकों से वैध रूप से देय मुआवजे का 20 प्रतिशत क्यों रोका जा रहा है? विकास के नाम पर लोगों की जमीनें ली गईं, फिर भी उन्हें उनका वाजिब हक नहीं दिया गया। यह अन्याय अब और बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। उन्होंने तत्काल जवाबदेही तय करने और रोके गए भुगतान जारी करने की मांग की।
बैठक के बाद पठानिया ने उधमपुर के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का व्यापक दौरा किया। अधिकारियों के साथ उन्होंने क्षतिग्रस्त सड़कों, सार्वजनिक बुनियादी ढांचे और आवासीय भवनों का निरीक्षण किया। उन्होंने प्रशासन से अनुरोध कि एसडीआरएफ मानदंडों में संशोधन करें ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि प्रत्येक वर्षा प्रभावित परिवार को मुआवजा मिले।
इसके साथ ही उन्होंने प्रभावित क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति तुरंत बहाल करने, लारंग, काह और विश्वविद्यालय परिसर की सड़क सहित अवरुद्ध सड़कों से मलवा हटाने और क्षतिग्रस्त सिंचाई नहरों और बिजली लाइनों की अविलंब मरम्मत करने को कहा।
प्रभावित परिवारों से बातचीत करते हुए पठानिया ने जोर देकर कहा कि बाढ़ ने घरों और बुनियादी ढांचे को तबाह कर दिया है। राहत और पुनर्वास में देरी नहीं होनी चाहिए। संकट की इस घड़ी में सरकार को लोगों के साथ खड़ा होना चाहिए।
बैठक में पूरन चंद (डीडीसी), मंडल प्रधान, आशीष शर्मा, ललिता शर्मा और कई समुदाय के सदस्यों सहित कई प्रमुख नेताओं ने भाग लिया।