उधमपुर। शहर के साथ लगते रठियान के खरूनी गांव में रविवार को शुरू हुई श्रीमद्भागवत कथा सप्ताह दूसरे दिन सोमवार को भी जारी रही। इसमें क्षेत्र के स्थानीय संगत और आसपास के श्रद्धालुओं ने भाग लिया।
कथावाचक सुभाष शास्त्री ने कहा कि दुखी क्यों होते हो? क्योंकि आनंद तो हमारा स्वभाव है। जब तक आप सत्संग में बैठे हैं, आप आनंदित रहते हैं। और, जैसे ही आप वापस सांसारिक क्रिया कलापों में शामिल होते हैं, आप फिर से दुखी होना शुरू हो जाते हैं। संत कबीर कहते है कि ‘मन मस्त हुआ तब क्या बोले’ अर्थात जब हमारे अंदर ज्ञान उतरता है, तो आनंद भर जाता है, और मन मस्त हो जाता है। तब हमारा बोलना बंद हो जाता है।
इसका अर्थ यह हुआ कि हम मस्त नहीं हैं, आनंदित नहीं हैं, तब ही बोल रहे हैं। इंसान जब आनंदित होता है तो चुप होता है। और, जब दुखी होता है तो अनाप-शनाप बोलता है। जब शरीर स्वस्थ होता है तो इसकी चर्चा कोई नहीं करता। लेकिन, जैसे ही किसी को कोई बीमारी हो जाती है, तो वह बार-बार इसकी चर्चा करता रहता है।
कथावाचक ने कहा कि मन को सदा प्रभु का नाम जपते हुए आनंदित रखें। आपको फिर कुछ भी बोलने की आवश्यकता नहीं रहेगी। हे सत्संगियो, सदि मौन रह सको तो बहुत अच्छा है। लेकिन, बोलना पडे़ तो सत्य ही बोलो, मीठा बोलो। जो गुरू का शिष्य है, उसे अपनी वाणी से झूठ और कड़वाहट को निकाल देना चाहिए। गुरुमुख में सत्यता, नम्रता, सरलता, माधुर्य, आदि गुण होने चाहिए। ऐसा साधक दूसरों के साथ स्वयं को हमेशा आनंदित रखता है।
उधमपुर के रठियान इलाके में कथा सुनाते संत सुभाष शास्त्री व कथा सुनते श्रद्धालु- फोटो : UDHAMPUR