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सिरे नहीं चढ़ सकी दिल्ली कूच करने की योजना

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भवन मार्ग पर कार्य करने वाले मजदूरों और प्रशासन के बीच लगातार जारी कशमकश में मंगलवार को परिणाम प्रशासन के पक्ष में रहा। दूसरे दिन भी मजदूर नेता को अपने ही घर में नजरबंद रखा गया। इसके चलते दिल्ली पैदल कूच करने की योजना सिरे नहीं चढ़ सकी।
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इतना ही नहीं प्रशासन की पैनी नजर के बीच मजदूरों की बैठक तक संभव नहीं हो सकी। इस बीच भवन मार्ग पर मजदूरों की हड़ताल का मिलाजुला असर रहा। मंगलवार की सुबह से पहले ही मजदूर नेता को नजरबंद किए जाने की बात सभी मजदूरों में चर्चा का विषय बन चुकी थी।

इस दौरान शालीमार पार्क, पीर बाबा स्थल और चेतक भवन में मजदूरों द्वारा बैठक करने का प्रयास भी किया गया, लेकिन नेतृत्व की गैर मौजूदगी और हर ओर पुलिस की मौजूदगी में यह संभव नहीं हो सका। क्योंकि मजदूर नेता भूपिंदर सिंह दूसरे दिन भी अपने ही घर में नजरबंद रहे।
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जानकारी अनुसार एक दिन पहले सोमवार को जिला आयुक्त के नेतृत्व में यूनियन द्वारा मजदूरों के जब्त किए आई कार्ड को फिर से मजदूरों में वितरित करवा दिया गया था, जिसके परिणामस्वरूप मंगलवार को भवन मार्ग में मजदूरों की हड़ताल का मिलाजुला असर जरूर देखने को मिला।

हुक्म का इक्का साबित हुआ पंजीकरण
मजदूरों पर से म्युनिसिपल कमेटी का अधिकार समाप्त होने के बाद यूनियन द्वारा जारी किए जाना वाला आई कार्ड ही मजदूरी के लिए मंजूरी माना जा रहा था। लेकिन अब देरी से ही सही प्रशासन ने मजदूरों के पंजीकरण की पहल शुरू की है। इस घोषणा का असर यह हुआ कि मंगलवार को कई मजदूर भवन मार्ग पर काम करते नजर आए।
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