किश्तवाड़। दच्छन और पाडर में बादल फटने के बाद होंजड़ गांव के 19 मकान मलबे में तब्दील हो गए हैं। रेस्क्यू टीमों ने मौके पर पहुंचकर बचाव अभियान शुरू किया है पर सड़क न होने के कारण खोदाई के लिए मशीनरी नहीं पहुंच पा रही है। सभी टीमें हाथ से पेड़, पत्थर और लकड़ियां उठाने को मजबूर हैं। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल है कि पांच किलोमीटर तक फैले सैकड़ों टन मलबे को हाथों कैसे और कितने दिनों तक हटाया जाएगा।
जानकारी के अनुसार नालों में तेज बहाव के साथ काफी मात्रा में मलबा भी आया है। आशंका है कि लापता लोग मलबे के नीचे दबे हो सकते हैं, लेकिन मलबा बिना मशीनरी हटाना संभव नहीं है। गांव तक पहुंचने के लिए सड़क से करीब सात किलोमीटर का सफर पैदल तय करना पड़ता है। पूरा रास्ता पहाड़ी से होकर ही गुजरता है। संवाद