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न को सदा प्रभु का नाम जपते हुए आनंदित रखें--संत सुषाष शास्त्री

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बट्टलबालियां में सत्संग में विचार करते संत सुभाष शास्त्री व सत्संग सुनते श्रद्धालु - फोटो : UDHAMPUR
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उधमपुर। जिले के औद्योगिक क्षेत्र बट्टलबालियां के कांजली गांव में संत सुभाष शास्त्री ने सत्संग का आयोजन किया। इस दौरान भारी संख्या में लोग उपस्थित रहे।
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शास्त्री ने कहा कि दुखी क्यों होते हो? क्योंकि आनंद हमारा स्वभाव है। इसे और सरलता से आपको बताएं कि जब तक आप सत्संग में बैठे रहते हैं, आप आनंदित रहते हैं। और जैसे ही आप वापस सांसारिक क्रियाकलापों में शामिल होते हैं, आप दोबारा दुखी होना शुरू हो जाते हैं। संत कबीर दास कहते हैं कि ‘मन मस्त हुआ तक क्यों बोले’ अर्थात जब हमारे भीतर ज्ञान उतरता है, जब आनंद भर जाता है, और मन मस्त हो जाता है। तब हमारा बोलना बंद हो जाता है। इसका अर्थ यह हुआ कि जब हम मस्त नहीं हैं, तभी बोल रहे हैं।
उन्होंने कहा कि जब शरीर स्वस्थ होता है तो इसकी चर्चा कोई नहीं करता। लेकिन, जैसे ही किसी को कोई रोग हो जाता है, वह बार-बार इसकी चर्चा करता रहता है। तो मन को सदा प्रभु का नाम जपते हुए आनंदित रखें। आपको फिर कुछ भी बोलने की आवश्यकता नहीं रहेगी। यदि मौन रह सको तो बहुत अच्छा है। लेकिन, बोलना पडे़ तो सत्य बोलो, मीठा बोलो। जो शिष्य है, उसे वाणी से झूठ और कड़वाहट को निकाल देना चाहिए। गुरमुख में सत्यता, नम्रता, सरलता, माधुर्य, आदि गुण होने चाहिए। ऐसा साधक दूसरों को और स्वयं को सदा आनंदित रखता है।

बट्टलबालियां में सत्संग में विचार करते संत सुभाष शास्त्री व सत्संग सुनते श्रद्धालु- फोटो : UDHAMPUR

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