भद्रवाह। केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने वीरवार को भद्रवाह में देश के पहले दो दिवसीय ‘लैवेंडर फेस्टिवल’ का उद्घाटन किया। जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने भद्रवाह को भारत की बैंगनी क्रांति की जन्मस्थली बताया। उन्होंने कहा कि भद्रवाह देश में एग्री-टेक स्टार्टअप का संभावित गंतव्य है। डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भद्रवाह में देश का पहला लैवेंडर उत्सव आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रगतिशील सोच से ही संभव हुआ है। जिन क्षेत्रों को भारत की मुख्यधारा से काट दिया गया है, उन्हें विकास के माध्यम से मुख्यधारा से जोड़ा जाएगा।
उन्होंने कहा कि भद्रवाह की घाटी में आज का लैवेंडर महोत्सव केंद्र में वर्तमान प्रगतिशील सरकार के विकास का सबसे अच्छा उदाहरण है, जिसे बहुत पहले मनाया जाना चाहिए था। भद्रवाह भूमि और जलवायु के मामले में लैवेंडर की खेती के लिए सबसे अच्छी जगह है। डॉ. जितेंद्र सिंह ने यह भी कहा कि भद्रवाह जैसे दूर-दराज के क्षेत्रों के लिए पीएम मोदी के नेतृत्व वाली सरकार की विकास संभावनाओं का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि देश का पहला नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हाई एल्टीट्यूड मेडिसिन भद्रवाह में बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि डोडा और जम्मू-कश्मीर में अन्य दूरदराज के स्थानों पर मेडिकल कॉलेज पिछली सरकारों की प्राथमिकता नहीं थी, जो दर्शाता है कि यह सरकार देश के कोने-कोने में विकास करने में कोई कसर नहीं छोड़ रही है। आगे उन्होंने कहा कि सड़कों और सुरंगों का निर्माण किया जा रहा है। सभी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाया जा रहा है। ‘स्टार्ट-अप इंडिया, स्टैंड-अप इंडिया’ के तहत रोजगार सृजन के अवसर पैदा किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि लैवेंडर की खेती से किसानों की आय न केवल दोगुनी बल्कि चौगुनी हो गई है। डॉ. सिंह ने छह अलग-अलग स्थानों पर स्थित लैवेंडर के लिए सीएसआईआर-आईआईआईएम के तहत छह आसवन इकाइयों का भी उद्घाटन किया।
उद्योगपति और किसान सम्मानित
लैवेंडर फेस्टिवल के दौरान कई उद्योगपतियों, संभावित किसानों को सम्मानित भी किया गया। भद्रवाह में लैवेंडर महोत्सव में जम्मू और कश्मीर सहित देश के विभिन्न हिस्सों से आए वैज्ञानिकों, प्रगतिशील किसानों और कृषि उद्यमियों द्वारा बड़ी संख्या में भाग लिया जा रहा है। सीएसआईआर-आईआईआईएम ने डोडा, रामा, किश्तवाड़, कठुआ, उधमपुर, राजोरी, पुलवामा, अनंतनाग, कुपवाड़ा और बांदीपोरा जिलों में किसानों के लिए लैवेंडर पेश किया। लैवेंडर की खेती ने जम्मू-कश्मीर के भौगोलिक दृष्टि से दूरदराज के इलाकों में लगभग 5,000 किसानों और युवा उद्यमियों को रोजगार दिया है। 200 एकड़ से ज्यादा जमीन पर 1,000 से ज्यादा किसान परिवार इसकी खेती कर रहे हैं। इस मौके सीएसआईआर-आईआईआईएम जम्मू के निदेशक डॉ. डीएस रेड्डी, डीडीसी अध्यक्ष धनंतर सिंह, उपाध्यक्ष संगीता भगत, पूर्व मंत्री एवं विधायक शक्ति राज परिहार, नोडल वैज्ञानिक सीएसआईआर डॉ. सुमित गरोला के अलावा लैवेंडर की खेती करने वाले वैज्ञानिक और संभावित किसान मौजूद थे।