उधमपुर। अलंकरण समारोह में पूर्वी लद्दाख स्थित वास्तविक नियंत्रण रेखा पर चीन से तनाव के बीच भारतीय जांबाजों के शौर्य की गाथा भी सुनाई गई। लद्दाख में ऑपरेशन स्नो लेपर्ड के दौरान मेजर दीपन को प्लाटून के साथ वास्तविक नियंत्रण रेखा पर 17 हजार फीट ऊंचाई पर रिज लाइन पर कब्जा करने का काम सौंपा गया। दुश्मन के सैनिक भी तेजी से रिज लाइन की ओर बढ़ रहे थे। मेजर अपनी प्लाटून का नेतृत्व करते हुए कठिन मार्ग से लक्ष्य पर दुश्मन से पहले पहुंचे और बढ़ते हुए दुश्मन को रिजलाइन से पहले रोका, जिससे दुश्मन के नापाक इरादे विफल हो गए।
कैप्टन विश्वदीप सिंह को भी सेना पदक वीरता से सम्मानित किया गया। 30 अगस्त 2020 की रात को एक ऑपरेशन में उन्होंने उत्तम युद्ध कौशल का प्रदर्शन करते हुए एक राइफल कंपनी को 18 हजार फीट ऊंचाई पर स्थित जगह तक पहुंचने में मार्गदर्शन किया। इसके परिणाम स्वरूप भारतीय सेना उस महत्वपूर्ण स्थान पर तैनात होकर दुश्मन पर अपना प्रभुत्व बनाने में सक्षम रही। इसी तरह एक-एक कर वीर अधिकारियों व जवानों की वीर गाथाओं को सुनाकर 116 पदक प्रदान किए गए।
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लोगों की सुरक्षा मजबूत कंधों पर
मुख्य मेहमान ने कहा कि यह उनके लिए और यहां उपस्थित सभी सात विशिष्ट अतिथियों के लिए अत्यंत गर्व का विषय है कि वह इन गौरवशाली क्षणों को सात वीरता पुरस्कार से सम्मानित सैनिकों के साथ साझा कर रहे हैं। उन्होंने सेना की सर्वोच्च परंपराओं में विदित वीरता और बलिदान के प्रेरणादायक कार्यों के लिये बहादुर पुरस्कार विजेताओं को बधाई दी। उन्होंने कहा कि उत्तरी कमान देश की सुरक्षा के लिए सदैव तत्पर है। आंतरिक सुरक्षा खतरों के अलावा देश के उत्तरी और पश्चिमी क्षेत्रों का सामना करने वाली यह एकमात्र कमान हैं। उत्तरी कमान के सभी पदों के बीच असाधारण जोश और उत्साह लोगों को आश्वस्त करता है कि उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी मजबूत कंधों पर है।