उधमपुर में मंडी में कोकून बेचने के लिए किसान।
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उधमपुर। कोकून मंडी में पिछले वर्ष के मुकाबले इस बार कीट पालकों को उचित दाम नहीं मिल पा रहें हैं। इससे कीट पालक किसान परेशान हैं। इसको लेकर कुछ कीट पालकों ने प्रदर्शन भी किया था।
मंडी के दसवें दिन भी काफी संख्या में जिले के विभिन्न हिस्सों से किसान अपनी तैयार कोकून को बिक्री करने के लिए पहुंचे। मंडी में कोकून के कम दाम मिलने से उन्हें काफी मायूसी का सामना करना पड़ा। कीट पालकों के अनुसार पिछले साल के मुकाबले इस बार बेहद ही कम दाम मिल रहा है। इससे उन्हें कोकून को तैयार करने में आई लागत भी पूरी नहीं हो रही है। उन्होंने कहा कि विभाग को कोकून का कम से कम एक हजार रुपये निर्धारित करना चाहिए। ताकि किसानों को निराश न होना पडे। उन्होंने कहा कि कभी कम तो कभी अधिक दाम मिलने से बहुत से किसान कोकून उत्पादन का कार्य करना छोड़ने लगे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को कोकून के उत्पादन को बढ़ावा देने के इसके उचित दाम निर्धारित किए जाने की जरूरत है।
पिछले साल के मुकाबले इस बार कोकून का रेट बेहद ही कम मिल रहा है। जिससे उनको कोकून उत्पादन में आई लागत भी पूरी नहीं हो पा रही है। अगर जल्द ही सरकार ने कोकून का उचित दाम निर्धारित नहीं किया तो अधिकतर उत्पादक इस कार्य से पीछे हटने लगेंगे। इस बार मिले कोकून के दाम से उन्हें मुनाफे की बजाय नुकसान हुआ है।
सतपाल
व्यापारी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर धागे का रेट कम होने की बात कह रहें हैं। जबकि किसानों को कोकून में उत्पादन में पहले के मुकाबले ही मेहनत और लागत लगी है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रेट कम होने की मार अब किसानों को सहनी पडे़गी। अगर सरकार किसानों को राहत देने के लिए इसका उचित दाम निर्धारित कर दे तो किसानों को होने वाली हानि से राहत मिल सकेगी।
रामपाल
खुद के शहतूत के पेड नहीं होने से अन्य किसानों से मंहगे दाम पर शहतूत के पत्ते खरीद की कोकून का उत्पादन किया था। लेकिन तैयार कोकून का उचित दाम मिल पाने से काफी निराशा हुई है। संबधित विभाग कोकून की पैदावार को लेकर किसानों को प्रोत्साहित तो करता है लेकिन अगर उन्हें कीटों की मुख्य खुराक शहतूत के पत्तों को भी सस्ते दामों पर उपलब्ध करवाया जाए तो कीट पालकों को काफी राहत मिलेगी।
रमेश कुमार
कीट पालकों को नुकसान से बचाने के लिए सरकार को उन्हें उचित सुविधाएं मुहैया करवाने के साथ ही तैयार कोकून के उचित रेट निर्धारित करने चाहिए। इसके साथ जिन किसानों के पास अपने शेड नहीं हैं उन्हे शेड की सुविधा मुहैया करवानी चाहिए। ताकि मौसम की वजह से कोकून की पैदावार में खराबी न आए। खराब उत्पादन के कारण भी कई बार किसानों की मेहनत पर पानी फिर जाता है जिससे उन्हें काफी निराश होना पडता है।
मोहनलाल