संवाद न्यूज एजेंसी
रामनगर। गांव पिंगर में स्थित माता पिंगला का पवित्र स्थान है। यहां पर साल में दो बार शारदीय तथा चैत्र नवरात्र में राज्य भर के हजारों भक्त दर्शन करने के लिए पहुंचते हैं लेकिन बाहरी राज्यों के पर्यटकों की नजर इस पवित्र स्थान पर अभी तक नहीं पड़ी है। हालांकि पिंगला माता के दर्शन के लिए हर नवरात्र में लोगों का आना-जाना लगा रहता है वहीं, श्रद्धालुओं के लिए लंगर की व्यवस्था भी लोगों द्वारा की जाती है।
गौरतलब है कि शारदीय नवरात्र में पिंगला माता की यात्रा की जाती है। रामनगर अखंड ज्योति कमेटी की ओर से वार्षिक छड़ी यात्रा मां के दरबार ले जाई जाती है। नवरात्र के पहले दिन कस्बे के घास मंडी चबूतरा में पिंगला माता की अखंड ज्योति प्रज्वलित की जाती है। सन 1987 में स्वर्गीय ओपी जंडियाल ने यह यात्रा शुरू की थी जिसके बाद संयोजक विनय जंडियाल साथियों के साथ यह परंपरा निभा रहे हैं। दूसरी तरफ शीतला माता मंदिर से भी शीतला माता सत्संग कमेटी की ओर से पिछले 13 वर्षों से लगातार चैत्र नवरात्र से कुछ दिन पहले माता के दरबार तक छड़ी यात्रा निकालते हैं।
ऐसे आई मां की पिंडियां अस्तित्व में
इस पवित्र तीर्थ स्थल के बारे में प्रचलित कथा के मुताबिक बहुत समय पहले पिंगर गांव के बच्चे प्रतिदिन जंगल में पशु चराने के लिए जाते थे। वहां पर उन्हें एक बहुत ही सुंदर कन्या रोजाना भोजन करवाती थी परंतु कन्या ने यह बात किसी को भी न बताने के लिए कहा था। बच्चे जब घर लौटते थे तो वे खाना नहीं खाते थे। एक दिन अभिभावकों ने बच्चों का पीछा किया। जब बच्चे जंगल में पशु चराने के लिए रवाना हुए तो परिवार के अन्य सदस्य भी वहां पहुंच गए। उन्होंने देखा के एक सुंदर कन्या उनके बच्चों को भोजन करा रही है। जैसे ही वह कुछ कहने के लिए आगे बढ़े, कन्या दौड़ती हुई गुफा के भीतर चली गई। जब गांव के लोगों ने गुफा के भीतर जाकर देखा तो कन्या गायब थी और वहां पर मां की पवित्र पिंडियां मौजूद थीं। तब से गांव के लोग इस स्थान की पूजा-अर्चना करते आ रहे हैं।
प्रवेश द्वार पर है भगवान शिव की पिंडी
प्रवेश द्वार के ही एक तरफ भगवान शिव पिंडी के रूप में विराजमान है। गुफा के मध्य भाग में भगवान महावीर एक स्तंभ के रूप में प्रकट हुए हैं। लोगों की यह मान्यता है कि यदि कोई व्यक्ति बिना कुछ खाए-पीए सच्ची श्रद्धा के साथ अपने हाथ की एक उंगली के साथ उस स्तंभ को हिलाए तो यह हिलना आरंभ हो जाता है। गुफा के आखिरी भाग पर माता पिंगला की पिंडियां मौजूद हैं। इस स्थान पर आज भी वह घड़ा स्थित है जिसके बारे में मान्यता है कि मां पिंगला गांव के बच्चों को इसी घड़े में खाना बनाकर खिलाया करती थी। इसी घड़े के ऊपर ऐसा प्रतीत होता है कि जैसे गाय के चार थन बने हुए हैं। इससे हमेशा दूध का द्रव्य टपकता रहता है।