उधमपुर। जम्मू-कश्मीर नेशनल पैंथर्स पार्टी के अध्यक्ष एवं पूर्व मंत्री हर्ष देव सिंह ने दूरदराज इलाकों में शिक्षा प्रणाली चरमराने का आरोप लगाया है। उन्होंने सरकार से मांग की कि छात्रों के भविष्य को बचाने के लिए उचित उपाय किए जाएं।
पूर्व मंत्री ने कहा कि दो वर्षों से कोरोना महामारी के दौरान ग्रामीण युवा व छात्र अत्यधिक पीड़ित हैं। इस बीच सरकार ऑनलाइन कक्षाएं चलाने का दावा कर रही है। लेकिन, जमीनी स्तर पर स्थिति बिल्कुल अलग है। कई ग्रामीण क्षेत्रों में ऑनलाइन अध्ययन के लिए उचित इंटरनेट सुविधाएं और टावर भी नहीं हैं। इसके अलावा वर्षों से बहुत से ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूल शिक्षण स्टाफ की कमी से जूझ रहे हैं, जो छात्रों की शैक्षिक गतिविधियों में बड़ी बाधा बन गई है। वहीं, कर्मचारियों की कमी से निपटने की बजाय सरकार ने अगले कुछ वर्षों के लिए शिक्षकों की नियुक्ति पर प्रतिबंध लगा दिया है।
उन्होंने आरईटी योजना के पुनर्जीवित करने की मांग करते हुए तर्क दिया कि ग्रामीण स्कूलों में कर्मचारियों की कमी को पूरा करने का यही एकमात्र तरीका है। लेकिन, सरकार ने उक्त आरईटी नीति को बंद करने की घोषणा के साथ ग्रामीण शिक्षा को सबसे बड़ा झटका लगाया है। अगर जल्द ही इसके लिए उचित उपाय नहीं किए गए तो छात्रों के भविष्य खतरे में आ जाएगा। उन्होंने इस मामले पर उपराज्यपाल के व्यक्तिगत हस्तक्षेप की मांग करते हुए कहा कि आरईटी नीति को वापस लाया जाए। उन्होंने आरईटी की उस चयन सूची को तत्काल जारी करने को कहा, जिनके पैनल 2014 के बाद तैयार और स्वीकृत किए गए थे।