उधमपुर। देविका तट स्थित निजी पैलेस में जारी श्रीमद्भगवत कथा सप्ताह में वीरवार को कथावाचक सुभाष शास्त्री ने कहा कि शांति की तलाश हर मानव को रहती है। इसलिए वह मृग की तरह भटकता रहता है, जबकि कस्तूरी तो मृग की नाभि में रहती है। ठीक इसी प्रकार शांति मनुष्य के भीतर होती है और वह उसे जगत में खोजता फिरता है।
उन्होंने कहा कि शांति कभी भौतिक सुख साधनों और बाहरी जगत से नहीं मिल सकती है। यह तो अपने अंदर से और संतोषी मनोवृत्ति से ही मिलती है। शांति बाहर की नहीं भीतर की चीज है। संवाद