प्रस्ताव में अब तक आठ संशोधन लाए गए हैं। इनमें चार संशोधन नेशनल कॉन्फ्रेंस के सदस्यों, दो पीडीपी, एक कांग्रेस और एक निर्दलीय विधायक की ओर से लाए गए हैं। इससे प्रस्ताव का दायरा और व्यापक होने की संभावना है।
सदन की कार्यवाही शुरू होने से पहले नेता प्रतिपक्ष सुनील शर्मा ने उमर अब्दुल्ला सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि जब जनता बिजली, पानी और सड़क जैसे बुनियादी मुद्दों पर सवाल करती है तो सरकार अनुच्छेद 370 और प्री-1953 व्यवस्था का मुद्दा उठाती है। शर्मा ने कहा कि भाजपा राज्य का दर्जा बहाल करने के मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार है, लेकिन अनुच्छेद 370, दो झंडे या दो संविधान जैसी व्यवस्था को स्वीकार नहीं किया जाएगा।
वहीं भाजपा विधायक आरएस पठानिया ने विधानसभा अध्यक्ष अब्दुल रहीम राथर के खिलाफ 23 सदस्यों के हस्ताक्षर वाला प्रस्ताव दिए जाने की बात कही। भाजपा का आरोप है कि अध्यक्ष का संचालन संविधान और संसदीय नियमों के अनुरूप नहीं है। हालांकि, अध्यक्ष अब्दुल रहीम राथर ने कहा कि उन्हें अभी ऐसा कोई प्रस्ताव प्राप्त नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि नियमों के तहत मिले प्रस्ताव पर विधानसभा सचिवालय मेरिट के आधार पर फैसला करेगा।
कार्यवाही के दौरान भाजपा विधायक सदन के वेल में पहुंचकर विरोध करने लगे। उन्होंने प्रस्ताव को गैर-संवैधानिक बताते हुए नारेबाजी की और इसकी प्रतियां भी फाड़ दीं। विधायक कुर्सी छोड़ो, लोकतंत्र की हत्या बंद करो, भारत माता की जय और वंदे मातरम जैसे नारे लगाते रहे। शुक्रवार को भी प्रस्ताव को लेकर सदन में भारी हंगामा हुआ था और भाजपा विधायकों ने प्रस्ताव की प्रतियां फाड़ी थीं।
प्रश्नकाल के दौरान भाजपा के कुछ सदस्यों के सवाल सूचीबद्ध थे, लेकिन विरोध के चलते वे अपने सवाल सदन में नहीं रख सके और वेल में प्रदर्शन जारी रखा। इसके जवाब में सत्तापक्ष के सदस्यों ने भी नारेबाजी की।
इस बीच नेता प्रतिपक्ष सुनील शर्मा ने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के खिलाफ नारे लगाए जिस पर नेशनल कॉन्फ्रेंस के विधायक भड़क गए। उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी ने मुख्यमंत्री के खिलाफ इस्तेमाल की गई भाषा पर सुनील शर्मा से माफी मांगने की मांग की। इसके बाद सदन में फिर हंगामा शुरू हो गया। विधानसभा में प्रस्ताव को लेकर सत्ता पक्ष और भाजपा के बीच टकराव के कारण कार्यवाही के दौरान हंगामा जारी हैं।