अधिकार तिरंगा यात्रा से फिर करेंगे आवाज बुलंद
ओबीसी से जुड़े लोग फिर अधिकार तिरंगा यात्रा से अपनी आवाज बुलंद करेंगे। वे 27 फीसदी आरक्षण की मांग को लेकर 23 से 26 जनवरी तक कठुआ जिले के बसोहली व बिलावर में अधिकार तिरंगा यात्राएं निकालेंगे। इसके तहत वे रैलियां निकालकर केंद्र सरकार से अन्य राज्यों की तरह मंडल कमीशन की रिपोर्ट को लागू करते हुए ओबीसी को 27 फीसदी आरक्षण देने की मांग करेंगे। पहले भी इस प्रकार की यात्राएं जम्मू संभाग के कई स्थानों पर निकाली जा चुकी हैं।
जम्मू-कश्मीर विस में पांच सीटों पर होगा मनोनयन
जम्मू-कश्मीर विधानसभा में अब पांच सीटों पर मनोनयन होगा। इनमें दो सीटों पर महिलाओं का मनोनयन पहले की तरह होगा। जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन संशोधन अधिनियम के बाद और तीन सदस्य मनोनीत होंगे। इनमें दो कश्मीरी पंडित तथा एक पीओजेके का नुमाइंदा होगा। कश्मीरी पंडितों में से एक महिला होगी।
अनुच्छेद 370 व 35ए हटने के बाद ओबीसी आरक्षण का जम्मू-कश्मीर में दरवाजा खुल गया है। पहले की सरकारें केंद्रीय कानून को यहां लागू नहीं होने देती थीं, जिससे एक बड़ा तबका आरक्षण के लाभ से वंचित रहा है। 1992 में मंडल कमीशन की रिपोर्ट पूरे देश में लागू हुई, लेकिन जम्मू कश्मीर में तीन दशक बाद भी यह सपना है। कितना फीसदी आरक्षण मिलेगा यह तय नहीं, लेकिन उम्मीद है कि उप राज्यपाल प्रशासन सम्मानजनक आरक्षण का प्रावधान करेगा। - रक्षपाल वर्मा, पूर्व उपाध्यक्ष-पिछड़ा वर्ग बोर्ड जम्मू कश्मीर।
राशन कार्ड तो मिल गया है, लेकिन कितना राशन मिलता है यह देखना है। ओबीसी के साथ शुरू से ही दोहरा मापदंड अपनाया गया। जब पूरे देश में मंडल कमीशन लागू हो गया तब भी जम्मू कश्मीर के लोग 30 साल से अधिक समय से इससे वंचित हैं। हमें स्थानीय तथा पंचायत चुनावों तक में आरक्षण नहीं है। अन्य राज्यों की नौकरियों में भी हमारी युवा पीढ़ी भाग्य नहीं आजमा सकती हैं। हमारे बच्चों की स्कॉलरशिप तीन साल से बंद है। कई मुद्दे हैं जिन पर सरकार को ध्यान देना है। - बंशी लाल चौधरी, संयोजक-ओबीसी महासभा।